बिहार विधानसभा चुनाव २०२५ के मतदान संपन्न होने के बाद जारी एग्जिट पोल्स में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सत्ता में वापसी का संकेत मिला है। विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार, एनडीए को राज्य में १३० से १६० सीटों के बीच स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है, जिससे उसका शासन एक बार फिर स्थापित होने की संभावना मजबूत हो गई है।
पीपल पल्स सर्वेक्षण के अनुसार, एनडीए को १३३ से १५९ सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन (राजद, कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन) को ७५ से १०१ सीटों तक सीमित बताया गया है। सर्वे में यह भी अनुमान लगाया गया कि प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज को ० से ५ सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार २ से ८ सीटें हासिल कर सकते हैं।
दैनिक भास्कर एग्जिट पोल में भी एनडीए को स्पष्ट बढ़त दिखाई गई है। इसके अनुसार, एनडीए को १४५ से १६० सीटें, महागठबंधन को ७३ से ९१ सीटें, जबकि जन सुराज को कोई प्रभावशाली सीट मिलने की संभावना नहीं जताई गई है। अन्य दलों और निर्दलीयों को ५ से १० सीटें मिलने का अनुमान है।
डीवीसी रिसर्च सर्वेक्षण के अनुसार, एनडीए को १३७ से १५२ सीटें मिलने की संभावना है, जबकि महागठबंधन ८३ से ९८ सीटों तक सीमित रह सकता है। जन सुराज को २ से ४ सीटें और अन्य दलों को ४ से ८ सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।
एग्जिट पोल्स का यह रुझान दर्शाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में भाजपा-जदयू गठबंधन राज्य की जनता का विश्वास बरकरार रखने में सफल रहा है। एनडीए का चुनाव अभियान मुख्य रूप से विकास, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर केंद्रित था, जबकि विपक्ष ने बेरोजगारी, महंगाई और सुशासन जैसे मुद्दों को चुनावी बहस का केंद्र बनाया।
चुनाव आयोग के अनुसार, मंगलवार को संपन्न हुए दूसरे और अंतिम चरण के मतदान में ६७.१४ प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सबसे अधिक मतदान किशनगंज (७६.२६ प्रतिशत) में हुआ, इसके बाद कटिहार (७५.२३ प्रतिशत), पूर्णिया (७३.७९ प्रतिशत), और सुपौल (७०.६९ प्रतिशत) का स्थान रहा।
अन्य जिलों में पूर्वी चंपारण (६९.०२ प्रतिशत), बांका (६८.९१ प्रतिशत), गया (६७.५० प्रतिशत) और कैमूर (६७.२२ प्रतिशत) में भी उत्साहजनक मतदान दर्ज किया गया। नवादा में सबसे कम ५७.११ प्रतिशत मतदान हुआ।
पहले चरण के मतदान में ६५.०८ प्रतिशत की रिकॉर्ड भागीदारी रही, जिसे राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इस बार उच्च मतदान दर ने जन उत्साह और मतदाताओं की सक्रियता को दर्शाया है, जिसने चुनावी नतीजों पर असर डाला होगा।
२०२५ के बिहार चुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज के बीच त्रिकोणीय रहा।
एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। वहीं महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी–लेनिनवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं।
२०२० के विधानसभा चुनावों में एनडीए ने १२५ सीटें, जबकि महागठबंधन ने ११० सीटें जीती थीं। उस चुनाव में भाजपा ने ७४, जदयू ने ४३, राजद ने ७५, और कांग्रेस ने १९ सीटें हासिल की थीं।
नवीनतम एग्जिट पोल्स के अनुसार, इस बार एनडीए अपनी पिछली प्रदर्शन से बेहतर परिणाम दर्ज कर सकता है। जबकि महागठबंधन अपने परंपरागत जनाधार से आगे बढ़ने में असफल दिख रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव २०२५ के परिणामों की आधिकारिक घोषणा चुनाव आयोग द्वारा मतगणना पूर्ण होने के बाद की जाएगी।






