नई दिल्ली: नये श्रम कानून शुक्रवार से पूरे देश में लागू हो गये, जिससे भारत के श्रम कानूनों के इतिहास में सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। चार नई श्रम संहिताएँ—वेतन, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा तथा औद्योगिक संबंध—अब औपचारिक रूप से प्रभावी हो गई हैं। नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार ये संहिताएँ २९ पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर एक सरल, पारदर्शी और व्यापक श्रम ढांचा तैयार करती हैं, जिसका उद्देश्य देशभर के श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को लाभ पहुँचाना है।
सरकार ने शुक्रवार को जारी अधिसूचना में कहा कि इन श्रम संहिताओं का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को न्यूनतम वेतन की गारंटी, व्यापक सामाजिक सुरक्षा, महिलाओं को समान अवसर तथा गिग और असंगठित श्रमिकों को विधिक पहचान प्रदान करना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लम्बे समय से तैयार की जा रही श्रम-संरचना सुधार प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंची है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा, “ये संहिताएँ श्रम कानूनों के इतिहास का सबसे बड़ा सुधार हैं। इनसे श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा, उन्हें न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा महिलाओं को समान अवसर सुनिश्चित होंगे। गिग और असंगठित श्रमिकों को पहली बार विधिक पहचान मिली है।”
सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि श्रम संहिताएँ न केवल श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करती हैं, बल्कि नियोक्ताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को भी सरल बनाती हैं। श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इस सुधार का संदेश स्पष्ट है—नीति के केंद्र में अब श्रमिक है।”
प्रमुख प्रावधान
- वेतन संहिता के तहत राज्यों को नियमित अंतराल पर न्यूनतम वेतन संशोधित करना होगा और विभिन्न क्षेत्रों तथा कौशल श्रेणियों में एकरूपता सुनिश्चित की जाएगी।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता गैर–औपचारिक क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों, प्लेटफॉर्म वर्करों और गिग कर्मियों को पेंशन, स्वास्थ्य सुरक्षा, मातृत्व लाभ और बेरोजगारी सहायता जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराएगी।
- व्यावसायिक सुरक्षा संहिता खनन, कारखानों और खतरनाक उद्योगों में सुरक्षा मानकों को कड़ा करेगी।
- औद्योगिक संबंध संहिता श्रमिक-नियोक्ता संबंधों, ट्रेड यूनियन पंजीकरण, विवाद समाधान तथा अनुशासनात्मक प्रावधानों को आधुनिक रूप देती है।
नई व्यवस्था में महिला श्रमिकों को विशेष महत्व दिया गया है। सरकार ने कहा है कि नये कानून महिलाओं के लिए समान वेतन, बेहतर मातृत्व लाभ तथा सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करेंगे। श्रम-अध्येता राधिका मेनन ने कहा, “नयी संहिताएँ महिला श्रमिकों को कार्यबल के अनिवार्य हिस्से के रूप में स्वीकार करती हैं और उन्हें लंबे समय से लंबित सुरक्षा प्रावधान देती हैं।”
गिग तथा प्लेटफॉर्म वर्करों को पहली बार श्रमिक की विधिक पहचान मिली है। अब वे विशेष सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के पात्र होंगे। एक यूनियन प्रतिनिधि ने कहा, “इससे उन लाखों लोगों को सम्मान और अधिकार मिले हैं जो अब तक औपचारिक ढांचे से बाहर काम कर रहे थे।”
उद्योग जगत और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
उद्योग संगठनों ने इन संहिताओं का स्वागत किया है और कहा है कि इससे अनुपालन से जुड़े भ्रम दूर होंगे। उद्योग निकाय के प्रतिनिधि राहुल मित्रा ने कहा, “संहिताओं का एकीकरण स्वागतयोग्य है, परंतु सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन्हें कितनी पारदर्शिता से लागू किया जाता है।”
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह सुधार वैश्विक श्रम मानकों के अनुरूप है और बदलते रोजगार परिदृश्य में भारत को प्रतिस्पर्धी बनाता है। विश्लेषक सोनिया अरोड़ा ने कहा, “सरल श्रम ढांचा श्रमिक हितों की रक्षा करते हुए औद्योगिक विकास को गति देगा।”
आगे की रूपरेखा
श्रम मंत्रालय ने बताया कि संहिताओं का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा तथा डिजिटल अनुपालन प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। राज्यों से समन्वय के लिए एक विशेष प्रवर्तन प्रभाग बनाया गया है। नियमित निगरानी के लिए डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे।
श्रमिक संगठनों ने इन संहिताओं को देर से आया लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण सुधार बताया है। स्वतंत्र श्रमिक महासंघ की सदस्य संगीता तिवारी ने कहा, “इन संहिताओं ने उन श्रमिकों को सम्मान और सुरक्षा दी है जिन्हें पहले कभी कानूनी संरक्षण नहीं मिला था।”
सरकार ने कहा कि ये संहिताएँ समावेशी, पारदर्शी और संतुलित श्रम बाज़ार के निर्माण का आधार बनेंगी, जिससे देश में रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। नई व्यवस्था लागू होते ही राज्यों और केंद्र की एजेंसियों ने अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने कहा कि लक्ष्य है:“ऐसा विकास जिसमें कोई श्रमिक पीछे न रह जाए।”






