चमोली: बदलते मौसम के साथ बद्रीनाथ धाम में आज विशेष सजावट के बीच शीतकालीन अवकाश की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। लगभग 10 क्विंटल फूलों से सुसज्जित मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट आज दोपहर लगभग 2:56 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे, जिससे चारधाम यात्रा 2025 का औपचारिक समापन होगा।
हमारे संवाददाता के अनुसार, सोमवार सुबह मंदिर के मुख्य द्वार और आसपास के क्षेत्र में गेंदा, गुलाब और अन्य मौसमी फूलों से भव्य सजावट की गई। यह अलंकरण केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इस बात का भी संकेत है कि पहाड़ी मौसम की कठिनाइयों को देखते हुए छह महीने के लिए धाम को बंद किया जा रहा है।
मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि लक्ष्मी मंदिर में पंचा पूजा और कढ़ाई भोग की परंपरा के अनुसार कल प्रतिष्ठा अनुष्ठान पूरा किया गया। इसके बाद मुख्य मंदिर को बंद करने की पारंपरिक तैयारियाँ शुरू हो गईं। घोषित समय तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे, इसके बाद कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
हमारे संवाददाता ने बताया कि लगभग 5000 से अधिक श्रद्धालुओं के आज दर्शन करने की संभावना है। कई श्रद्धालु सुबह से ही अंतिम पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि फूल-मालाओं और प्रसाद की बिक्री में काफी तेजी देखी गई है।
वरिष्ठ पुजारी अमरनाथ नंबूदरी ने कहा, “हमारे सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की गरिमा है। शीतकाल में बर्फबारी और खराब मौसम के कारण धाम तक पहुंचना असंभव हो जाता है, इसलिए कपाट बंद करना आवश्यक है।”
धाम की सजावट में स्थानीय स्वयंसेवकों और कारीगरों की बड़ी भूमिका रही, जिन्होंने रातभर काम कर मंदिर को आकर्षक रूप दिया। फूलों की माला, पाँच-पंखुड़ी आकृतियाँ और मंडल डिज़ाइन इस वर्ष की विशेष थीम रहे। एक कारीगर ने कहा, “यह हमारी श्रद्धांजलि है। हर वर्ष के अंत में हम अपने देवता को फूलों की इस सजावट के साथ प्रणाम करते हैं।”
कपाट बंद होने के साथ ही चारधाम यात्रा, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ, का वार्षिक समापन हो जाएगा। इस वर्ष यात्रा सुचारू रूप से संपन्न हुई, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन जल्द जारी करेगा।
स्थानीय पर्यटन अधिकारियों ने बताया कि यह समारोह लोगों को न केवल आध्यात्मिक महत्ता की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सुरक्षित मार्ग और मौसम की अनुकूलता पहाड़ी धार्मिक स्थलों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। धाम में तैनात प्रशासनिक टीमें शीतकाल के दौरान सुरक्षा और रख-रखाव की जिम्मेदारी निभाएँगी।
लक्ष्मी मंदिर और आसपास की सुविधाएँ अब “स्टैंड-बाई मोड” में रहेंगी। पुजारियों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे परंपरा के अनुसार अगले वर्ष धाम के पुनः खुलने पर दर्शन हेतु आएँ, जब मौसम अनुकूल होगा।
सीजन के अंतिम दिन मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों का धन्यवाद व्यक्त किया। एक श्रद्धालु ने कहा, “यात्रा के अंतिम दिन धाम को इस रूप में देखना जीवन का सौभाग्य है।”






