होमउत्तरकाशीचारधाम यात्रा २०२५ ने बनाया नया रिकॉर्ड

चारधाम यात्रा २०२५ ने बनाया नया रिकॉर्ड

देहरादून: चारधाम यात्रा २०२५ ने इस वर्ष एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही चारों धामों की यात्रा शीतकाल के छह महीनों के लिए औपचारिक रूप से समाप्त हो गई है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण यात्रा कई बार बाधित हुई, लेकिन इसके बावजूद इस वर्ष यात्रियों की संख्या ने इतिहास में दर्ज होने वाला नया आंकड़ा प्राप्त किया। राज्य सरकार के अनुसार इस बार ५१,०४,९७५ श्रद्धालुओं ने चारधाम यात्रा के दर्शन किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में ४,३५,९०१ अधिक है।

हमारे संवाददाता बताते हैं कि चारों धामों में इस वर्ष सर्वाधिक तीर्थयात्री श्री केदारनाथ धाम पहुंचे, जहां १७,६८,७९५ श्रद्धालुओं ने बाबा केदारनाथ के दर्शन किए। श्री बदरीनाथ धाम में १६,६०,२२४ श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। श्री गंगोत्री में ७,५७,०१० और श्री यमुनोत्री में ६,४४,५०५ भक्त पहुंचे। इस वर्ष हेमकुंट साहिब ने भी अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड दर्ज किया, जहां २,७४,४४१ श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और व्यवस्थित यात्रा प्रबंधन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी यात्रियों का भरोसा यात्रा व्यवस्था पर बना रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि “इस वर्ष यात्रा कई चुनौतियों से भरी रही। फिर भी तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ी है। यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यात्रा मार्गों पर सभी आवश्यक सेवाओं को मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाने, ट्रैफिक प्रबंधन को मजबूत करने, चिकित्सा सेवाओं को विस्तारित करने और संचार व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने के प्रयास किए गए हैं। पहले इन सुविधाओं की कमी महसूस होती थी लेकिन अब इनमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है।”

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होते ही शीतकालीन यात्रा की तैयारियां भी प्रारम्भ हो गई हैं। सर्दियों में देवताओं की पूजा पारंपरिक शीतकालीन स्थलों पर होती है जिसमें केदारनाथ धाम की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में, बदरीनाथ धाम की पूजा पांडुकेश्वर और ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर में, गंगोत्री की पूजा मुखबा में और यमुनोत्री की पूजा खरसाली में संपन्न होगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि शीतकालीन यात्रा राज्य के पर्यटन विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि “हमारी सरकार शीतकालीन यात्रा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष मुखबा में मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल पर पूजा अर्चना करने से यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।”

हमारे संवाददाता बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शीतकालीन यात्रा स्थलों पर आवास, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक और पारंपरिक दोनों माध्यमों से शीतकालीन यात्रा का प्रचार किया जाए ताकि देश विदेश के श्रद्धालु इन स्थलों तक पहुंच सकें।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि राज्य सरकार शीतकालीन यात्रा को साहसिक पर्यटन से जोड़कर एक समग्र सर्किट विकसित करने की योजना पर भी कार्य कर रही है। इस प्रयास से नए रोजगार अवसर पैदा होंगे और यात्री आध्यात्मिकता तथा प्रकृति का संयुक्त अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों के बाद यात्री सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। श्री बदरीनाथ धाम के लिए मास्टर प्लान के अंतर्गत कार्य किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि तीर्थयात्रियों को पूरे वर्ष सुरक्षित और सुगम अनुभव मिले।”

राज्य सरकार का मानना है कि इस वर्ष की रिकॉर्ड संख्या न केवल यात्रा प्रणाली की मजबूती दर्शाती है बल्कि आने वाले वर्षों में पर्यटन वृद्धि की भी स्पष्ट संभावनाएं दिखाती है।

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