देहरादून: उत्तराखंड में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं को अधिक प्रभावी, एकीकृत और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) राज्य सरकार के सभी विभागों को प्रदान की जाने वाली सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के लिए सिंगल नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि सभी विभागों की तकनीकी आवश्यकताओं को एक समन्वित ढांचे के तहत पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विभागों द्वारा स्वतंत्र रूप से आईटी सेवाएं विकसित करने से संसाधनों का दोहराव होता है और मानकीकरण में भी कठिनाई आती है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आईटीडीए राज्य सरकार के सभी विभागों के लिए वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने, उनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल तकनीकी गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और सेवा निरंतरता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी बेहतर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
स्टेट डेटा सेंटर 2.0 को शीघ्र तैयार करने के निर्देश
बैठक में मुख्य सचिव ने आईटीडीए की मौजूदा क्षमताओं की समीक्षा करते हुए कहा कि बढ़ती डिजिटल आवश्यकताओं को देखते हुए एजेंसी को और सशक्त बनाने की जरूरत है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्टेट डेटा सेंटर 2.0 को शीघ्र तैयार किया जाए, ताकि विभागीय डेटा का सुरक्षित भंडारण, तेज प्रोसेसिंग और निर्बाध ऑनलाइन सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
मुख्य सचिव ने कहा कि भविष्य में डिजिटल सेवाओं का दायरा और अधिक बढ़ेगा, ऐसे में मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर राज्य की प्राथमिक आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि क्लाउड आधारित सेवाएं, डेटा बैक-अप और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से भी नया डेटा सेंटर अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
आईटीडीए के लिए बजट प्रावधान और दीर्घकालिक योजना
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि आईटीडीए को प्रभावी रूप से कार्य करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि एजेंसी को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक बजट प्रावधान किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि आईटीडीए को आने वाले पांच से दस वर्षों की विभागीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति और संसाधन विकास की योजना तैयार करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और सरकार को भी समय के साथ खुद को अपडेट रखना होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्रों में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अभी से तैयारी करना आवश्यक है।
वेबसाइट और ऐप संचालन के लिए एसओपी बनाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने आईटीडीए को निर्देश दिए कि सभी विभागों की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के विकास, संचालन और रखरखाव के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) शीघ्र तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि एसओपी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स उपयोगकर्ता-अनुकूल, सुरक्षित, नियमित रूप से अपडेटेड और तकनीकी रूप से मानकीकृत हों।
उन्होंने यह भी कहा कि एसओपी में डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, शिकायत निवारण और तकनीकी सहायता से संबंधित प्रावधान स्पष्ट रूप से शामिल किए जाएं, ताकि नागरिकों को निर्बाध और भरोसेमंद सेवाएं मिल सकें।
राज्य की डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगी नई दिशा
मुख्य सचिव ने कहा कि आईटीडीए को सिंगल नोडल एजेंसी बनाए जाने से राज्य की डिजिटल गवर्नेंस प्रणाली को नई दिशा मिलेगी। इससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और नागरिकों को एक समान गुणवत्ता वाली डिजिटल सेवाएं प्राप्त होंगी।
बैठक में सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री नितेश कुमार झा, श्री दिलीप जावलकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने मुख्य सचिव को आईटीडीए की वर्तमान परियोजनाओं, तकनीकी क्षमताओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
राज्य सरकार के इस निर्णय को उत्तराखंड में डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में ई-गवर्नेंस सेवाओं का दायरा और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।






