दिल्ली कार धमाका मामले की जांच के सिलसिले में उत्तराखंड पुलिस ने राज्य में रासायनिक पदार्थों की खरीद-बिक्री पर सघन जांच शुरू कर दी है। देहरादून पुलिस ने विशेष जांच टीमें गठित की हैं जो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रासायनिक सामग्री की खरीद, भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला पर नजर रख रही हैं। जांच का उद्देश्य उन व्यक्तियों की पहचान करना है जिन्होंने हाल के महीनों में संदिग्ध रासायनिक पदार्थ खरीदे या उनका उपयोग किया हो सकता है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह के निर्देशन में पुलिस टीमों ने देहरादून और ऋषिकेश क्षेत्रों में रासायनिक दुकानों और गोदामों पर आकस्मिक छापेमारी की। जांच के दौरान सोडियम नाइट्रेट, पोटैशियम नाइट्रेट और गंधक (सल्फर) जैसे रासायनिक पदार्थों की बिक्री और भंडारण की बारीकी से जांच की गई, क्योंकि इनका प्रयोग विस्फोटक तैयार करने में किया जा सकता है। पुलिस ने दुकानों के स्टॉक रजिस्टर, बिल और ग्राहक विवरण जब्त कर उन्हें जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शहर कोतवाली क्षेत्र की चार दुकानों और ऋषिकेश की एक दुकान पर अनियमितताएं पाए जाने के बाद विशेष निगरानी रखी जा रही है। इन दुकानों में खरीदारों की पहचान और दस्तावेज अधूरे पाए गए हैं। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि हाल में रासायनिक पदार्थ खरीदने वाले सभी व्यक्तियों की पहचान की जा रही है और उनकी जानकारी दिल्ली पुलिस तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की जा रही है।
देहरादून पुलिस ने सभी रासायनिक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे केवल लाइसेंस प्राप्त खरीदारों को ही बिक्री करें और प्रत्येक लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड रखें, जिसमें मान्य पहचान पत्र और बिल शामिल हों। जिले के सभी थानों को दुकानों और गोदामों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अवैध रासायनिक व्यापार को रोका जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राज्य के बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वाड इकाइयों को सतर्क कर दिया गया है। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और अन्य परिवहन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राज्य खुफिया विभाग ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी संदिग्ध रासायनिक खरीद या गतिविधि की सूचना तुरंत मुख्यालय को भेजी जाए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच यह भी पता लगाएगी कि क्या दिल्ली कार धमाका मामले में प्रयुक्त रासायनिक सामग्री की आपूर्ति उत्तराखंड से हुई थी। जांच इस दिशा में भी जारी है कि कहीं अवैध या अपंजीकृत विक्रेताओं ने बिना अनुमति संवेदनशील रसायनों की आपूर्ति तो नहीं की।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य पुलिस एक केंद्रीकृत डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली लागू करने पर विचार कर रही है, जिससे रासायनिक खरीद-बिक्री की जानकारी तत्काल निगरानी में रहे। पुलिस ने कहा है कि जिन दुकानों में रासायनिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके लाइसेंस तुरंत निलंबित किए जाएंगे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






