ईटानगर: एक बढ़ते तनाव के माहौल में, ग़ैरक़ानूनी प्रवासियों को लेकर उठी चिंताओं के कारण अरुणाचल प्रदेश की राजधानी क्षेत्र में मंगलवार को १२ घंटे का बंद रहा। इस बंद ने इटानगर, नाहरलागुन और आसपास के क्षेत्रों में दैनिक गतिविधियों को लगभग पूरी तरह रोक दिया। बाज़ार बंद रहे और परिवहन सेवाएँ दिनभर प्रभावित रहीं।
यह बंद तीन युवा संगठनों द्वारा बुलाया गया था। इन संगठनों ने कथित ग़ैरक़ानूनी प्रवासियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की। उन्होंने राजधानी क्षेत्र के साप्ताहिक बाज़ारों पर रोक लगाने और नाहरलागुन क्षेत्र में स्थित एक धार्मिक ढाँचे को हटाने की भी माँग रखी। संगठनों का कहना था कि यह बंद स्थानीय हितों और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा के लिए आयोजित किया गया।
हमारे संवाददाता के अनुसार, इन संगठनों ने पहले निर्धारित २५ नवम्बर के बंद को स्थगित कर दिया था जब राज्य सरकार ने बातचीत का संकेत दिया था। इसके बाद ०५ दिसम्बर को राज्य के गृह मंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक चुनावी व्यस्तताओं के कारण नहीं हो पाई। इसी वजह से संगठनों ने ०९ दिसम्बर के लिए बंद की घोषणा कर दी और स्थानीय लोगों तथा व्यवसायियों से सहयोग की अपील की।
हमारे संवाददाता आगे बताते हैं कि जिला प्रशासन ने इस बंद को अवैध घोषित कर दिया। प्रशासन ने कहा कि ऐसे बंद आवश्यक सेवाओं पर असर डालते हैं, दिहाड़ी मजदूरों को नुकसान पहुँचाते हैं और आम लोगों के लिए कठिनाई पैदा करते हैं। प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय के उन आदेशों का भी हवाला दिया जिनमें इस प्रकार के बंदों को अनुचित बताया गया है। हालाँकि प्रशासन ने निवासियों से सामान्य गतिविधियाँ जारी रखने की अपील की, पर अधिकतर बाज़ार दिनभर बंद रहे।
हमारे संवाददाता ने बताया कि बंद के दौरान सार्वजनिक परिवहन लगभग पूरी तरह रुका रहा। बसें, टैक्सियाँ और अन्य वाहन सड़कों पर नहीं दिखे। कई लोग लंबी दूरी पैदल तय करते हुए अपने कार्यालयों और ज़रूरतमंद स्थानों तक पहुँचे। इटानगर और नाहरलागुन में सुरक्षा बल तैनात रहे और उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी। बंद के दौरान किसी बड़े उपद्रव की सूचना नहीं मिली।
हमारे संवाददाता ने आगे बताया कि इस बंद का आर्थिक प्रभाव तुरंत दिखा। दिहाड़ी मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आय पूरी तरह रुक गई। साप्ताहिक बाज़ार बंद रहने से स्थानीय विक्रेताओं को भारी नुकसान झेलना पड़ा। कई सामाजिक संगठनों ने युवा समूहों से बंद वापस लेने की अपील की, यह कहते हुए कि संवाद ही समस्याओं का बेहतर समाधान है।
दिनभर राजधानी क्षेत्र की मुख्य सड़कें सूनी रहीं। सामान्यतः व्यस्त रहने वाले बाज़ारों में सन्नाटा पसरा रहा। कई शैक्षणिक संस्थानों में उपस्थिति भी काफी कम रही। दोपहर बाद कुछ छोटे दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान खोलने की कोशिश की, पर पूरी सामान्य स्थिति बंद समाप्त होने के बाद ही लौट पाई।
युवा संगठनों ने कहा कि वे अपनी माँगों पर सरकार की स्पष्ट प्रतिक्रिया तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना था कि ग़ैरक़ानूनी प्रवासियों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि जनसांख्यिकीय संतुलन और सामाजिक सामंजस्य बनाए रखा जा सके।
जिला प्रशासन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता स्थिति को सामान्य करना है। उन्होंने लोगों से नियमित गतिविधियाँ शुरू करने की अपील की और सुरक्षा का भरोसा दिया। प्रशासन ने सभी समूहों से शांति बनाए रखने और कानूनी दायरे में संवाद जारी रखने की बात कही।
शाम होते ही बंद समाप्त हुआ और धीरे धीरे बाज़ार खुलने लगे। यातायात सामान्य होने लगा। हालाँकि बंद शांतिपूर्ण रहा, पर इसने लोगों में भविष्य में होने वाले बंदों को लेकर चिंता पैदा कर दी। व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना था कि समाधान तभी संभव है जब संवाद और स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय साथ साथ चलें।






