उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर पर्यटन विभाग नैनीताल द्वारा 1 नवम्बर से 5 नवम्बर 2025 तक नैना देवी हिमालयन बर्ड कंजर्वेशन रिजर्व, पंगोट में पांच दिवसीय बर्ड वॉचिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है। प्रशिक्षण के दौरान 25 प्रतिभागियों को अनुभवी विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों की सहायता से पंगोट–किलबरी–चाइना पीक मार्ग पर फील्ड प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो नैनीताल का सबसे समृद्ध पक्षी क्षेत्र माना जाता है।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी अतुल भंडारी ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित बर्ड वॉचिंग गाइड के रूप में तैयार करना है, ताकि वे पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें।
हमारे संवाददाता के अनुसार, इस कार्यक्रम में आस-पास के गांवों के युवाओं और प्रकृति प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया है। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक सत्रों के साथ-साथ फील्ड विज़िट शामिल हैं, जिनमें प्रतिभागियों को पक्षियों की पहचान उनके रंग, स्वर और उड़ान शैली से करने की जानकारी दी जा रही है।
भंडारी ने बताया कि राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर पर्यटन विभाग द्वारा राज्यभर में प्रचार-प्रसार, जन-जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि पर्यटन को स्थानीय स्तर पर सशक्त बनाया जा सके और जैव विविधता का संरक्षण हो सके।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि उत्तराखण्ड में 700 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें हिमालयन मोनाल (राज्य पक्षी), खलिज तीतर, कोकलास फीज़ेंट, ब्लू व्हिस्लिंग थ्रश, वर्डिटर फ्लाईकैचर, हिमालयन ग्रिफॉन, रुफस-बेलीड वुडपेकर और विभिन्न लाफिंग थ्रश व मिनिवेट्स शामिल हैं।
समुद्र तल से लगभग 6,300 फीट की ऊँचाई पर स्थित पंगोट को पक्षी प्रेमियों का स्वर्ग कहा जाता है। यहां के घने बांज, बुरांश और चीड़ के जंगल स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श आवास हैं। यह प्रशिक्षण स्थानीय समुदाय की भागीदारी के साथ संचालित किया जा रहा है, जिससे पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पर्यावरण-अनुकूल गाइडिंग तकनीकों, सुरक्षा उपायों और अतिथि सत्कार के बुनियादी सिद्धांतों की जानकारी दी जा रही है। विभाग का यह प्रयास है कि पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ आगे बढ़ें।






