उत्तराखण्ड राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज उत्तराखण्ड विधानसभा का विशेष सत्र देहरादून में सुबह 11 बजे से प्रारंभ होगा। यह सत्र राज्य की रजत जयंती समारोह की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु विधानसभा को संबोधित करेंगी।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी कार्यसूची के अनुसार सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से होगी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) स्वागत भाषण देंगे। प्रत्येक वक्ता को पांच मिनट का समय निर्धारित किया गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अभिभाषण इस सत्र का मुख्य आकर्षण रहेगा। उम्मीद है कि राष्ट्रपति अपने संबोधन में उत्तराखण्ड के 25 वर्षों की उपलब्धियों, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, पर्यटन और सामाजिक विकास के क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख करेंगी और आने वाले वर्षों में राज्य के समग्र विकास के लिए दिशा-निर्देश देंगी।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद सदन में “उत्तराखण्ड @ 25 — भविष्य की दिशा” विषय पर विशेष चर्चा की जाएगी। इस चर्चा में राज्य की अब तक की प्रगति और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा। मुख्यमंत्री धामी राज्य के अगले 25 वर्षों के विकास रोडमैप को प्रस्तुत करेंगे।
मुख्यमंत्री अपने वक्तव्य में ग्रामीण विकास, युवाओं के रोजगार, डिजिटल प्रशासन और पर्वतीय पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर जोर देंगे। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम” का उल्लेख करते हुए सीमांत क्षेत्रों के सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को सरकार की शीर्ष प्राथमिकता के रूप में रेखांकित करेंगे।
विधानसभा के उप सचिव हेम चंद्र प्रसाद द्वारा 2 नवंबर को जारी आदेश के अनुसार सत्र की कार्यसूची में नौ बिंदु शामिल हैं। इनमें राष्ट्रपति के संबोधन के अतिरिक्त “विजन दस्तावेज 2047” पर विशेष चर्चा और राज्य की भावी नीतियों की दिशा तय करने के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
राष्ट्रपति की यात्रा को देखते हुए विधानसभा परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। देहरादून पुलिस और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) ने संयुक्त रूप से सुरक्षा की विशेष तैयारियाँ की हैं। रायपुर रोड, हरिद्वार बाईपास और भरत नगर क्षेत्रों में यातायात को आंशिक रूप से नियंत्रित किया गया है।
विधानसभा भवन को फूलों और पारंपरिक सजावट से सजाया गया है। परिसर में एक डिजिटल प्रदर्शनी भी लगाई गई है जिसमें उत्तराखण्ड के 25 वर्षों की विकास यात्रा — राज्य गठन से लेकर वर्तमान तक की प्रमुख उपलब्धियाँ — प्रदर्शित की जा रही हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से आग्रह किया है कि वे इस अवसर को रचनात्मक संवाद का मंच बनाएं और राज्य की भावी दिशा पर सार्थक सुझाव दें। विपक्ष ने भी रजत जयंती समारोह का स्वागत करते हुए सरकार से पलायन, रोजगार, और पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की मांग की है।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि यह पहली बार है जब भारत की राष्ट्रपति उत्तराखण्ड विधानसभा को संबोधित करेंगी। यह अवसर राज्य के संवैधानिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विशेष सत्र न केवल जश्न का अवसर है, बल्कि उत्तराखण्ड के लिए आत्ममंथन और भविष्य की दिशा तय करने का भी मंच है। सरकार इस अवसर पर “उत्तराखण्ड विजन 2047” के तहत नए लक्ष्यों की घोषणा कर सकती है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि राज्य की विकास यात्रा अब आत्मनिर्भरता, सतत विकास और जनसहभागिता पर आधारित होगी। आने वाले 25 वर्ष उत्तराखण्ड को एक सशक्त, समृद्ध और आधुनिक राज्य के रूप में स्थापित करने के होंगे।
जैसे ही उत्तराखण्ड अपने 26वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, आज का यह विशेष सत्र अतीत की उपलब्धियों को सम्मान देने और भविष्य के निर्माण का संकल्प लेने का प्रतीक बन गया है।






