होममुख्य समाचारकार्तिक पूर्णिमा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब

कार्तिक पूर्णिमा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब

देवभूमि हरिद्वार में बुधवार तड़के से ही आस्था का जनसागर उमड़ पड़ा। पवित्र गंगा घाटों पर हजारों श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र स्नान के लिए पहुंचे। ठंडी हवाओं और कोहरे के बीच भी श्रद्धालुओं में अद्भुत उत्साह देखने को मिला। तड़के चार बजे से ही हर की पौड़ी, सुभाष घाट, गऊ घाट सहित अन्य घाटों पर धार्मिक आस्थावानों की भीड़ लगने लगी।

हमारे संवाददाता बताते हैं कि श्रद्धालु रात्रि बारह बजे के बाद से ही घाटों की ओर बढ़ने लगे थे। ब्रह्म मुहूर्त तक पूरा क्षेत्र ‘हर हर गंगे’ और ‘गंगा मइया की जय’ के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने दीपदान और पुष्पांजलि अर्पित कर पवित्र स्नान किया। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इस अवसर पर देश भर से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से भी हजारों लोग यहां आए। पूरा शहर दीपों और सजावट से जगमगा उठा। घाटों पर लगे अस्थायी शिविरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन होते रहे।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि जिला प्रशासन ने स्नान पर्व के लिए विशेष सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था की थी। शहर को 11 जोन और 36 सेक्टर में बांटा गया था। जल पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार गश्त कर रही थीं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में भीड़ को नियंत्रित किया गया। महिलाओं के लिए अलग स्नान स्थल बनाए गए और सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी तैनात रहीं।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य शिविर, प्राथमिक उपचार केंद्र, पेयजल व्यवस्था और लाउडस्पीकर से दिशा-निर्देश की घोषणाएं की गईं। वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सहायता हेतु स्वयंसेवकों को तैनात किया गया। प्रशासन ने अपील की कि श्रद्धालु गहराई वाले क्षेत्रों में न जाएं और भीड़ में धक्का-मुक्की से बचें।

ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बच्चे, महिलाएं और वृद्ध सभी श्रद्धा भाव से गंगा में डुबकी लगाते दिखाई दिए। घाटों पर दीपों की झिलमिलाहट और गूंजते भजनों ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

हर की पौड़ी पर आयोजित मुख्य स्नान के दौरान संत-महात्माओं और अखाड़ों के प्रमुखों ने भी गंगा पूजन कर आशीर्वाद दिया। सुबह के बाद श्रद्धालुओं ने घाटों से निकलकर मंदिरों में दर्शन किए और फिर दोपहर तक अधिकांश लोग लौट गए।

धार्मिक विद्वानों ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा का यह स्नान कार्तिक मास के संपूर्ण पुण्य का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था और इस दिन स्नान-दान-जप का अत्यंत महत्व है।

हरिद्वार में स्थानीय व्यवसायियों और दुकानदारों को भी इस अवसर से लाभ हुआ। फूल-माला, दीप, प्रसाद और धार्मिक वस्तुओं की बिक्री में तेजी रही। नगर निगम की ओर से सफाई अभियान चलाकर घाटों को स्वच्छ रखा गया।

हमारे संवाददाता बताते हैं कि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने देर शाम तक निगरानी की। किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं मिली। श्रद्धालुओं ने प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की और कहा कि स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।

शाम को हर की पौड़ी पर गंगा आरती के दौरान हजारों दीपों की रोशनी से पूरा क्षेत्र जगमगा उठा। भक्तों ने गंगा मइया से परिवार की सुख-समृद्धि और देश कल्याण की प्रार्थना की।

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर हरिद्वार ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि यह नगरी केवल तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आस्था और संस्कृति की जीवंत राजधानी है। श्रद्धा, सुरक्षा और संवेदनशीलता के साथ सम्पन्न यह पर्व राज्य के आध्यात्मिक पर्यटन की पहचान को और सुदृढ़ करेगा।

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