अल्मोड़ा आंदोलन
देहरादून से लौटे पदयात्री और स्थानीय लोगों ने गुरुवार को एक बैठक कर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हुई वार्ता के असफल रहने के बाद आंदोलन के नेता भुवन कठायत (केतीत) ने घोषणा की कि अब आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया तो यह आंदोलन अब अलोकतांत्रिक रूप ले सकता है।
हमारे संवाददाता के अनुसार, बैठक में पदयात्रियों ने देहरादून में अपने अनुभव और मुख्यमंत्री से हुई बातचीत की जानकारी साझा की। भुवन कठायत ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को तत्काल पूरा करने में असमर्थता जताई है और इसके लिए छह महीने का समय मांगा है।
कठायत ने कहा कि आंदोलन को अब एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि छह महीने बाद क्या होगा, इस पर सरकार को स्पष्ट स्पष्टीकरण देना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देहरादून में आंदोलन को दबाने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी अपने संकल्प पर अडिग रहे। उन्होंने कहा, “अब तक आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा था, लेकिन अब यह अलोकतांत्रिक रूप लेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
बैठक में लगभग 40 लोगों ने आमरण अनशन पर बैठने के लिए अपने नाम दर्ज कराए। आंदोलनकारियों ने घोषणा की कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि यह संघर्ष जनता की आवाज़ है और सरकार की उदासीनता जनता के धैर्य की परीक्षा ले रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी दल या व्यक्ति का नहीं, बल्कि जनहित और पारदर्शिता की मांग का प्रतीक है।
राज्य के राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। सरकार ने जहां छह महीने का समय मांगा है, वहीं आंदोलनकारियों की चेतावनी से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिन तनावपूर्ण हो सकते हैं।
प्रशासन ने स्थिति पर करीबी नजर रखनी शुरू कर दी है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। आंदोलन के नेता भुवन कठायत ने कहा कि वे संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, आंदोलन जारी रहेगा।






