देहरादून: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का ७१वां राष्ट्रीय अधिवेशन नवम्बर २८ से ३० तक देहरादून में आयोजित किया जाएगा। हमारे संवाददाता बताते हैं कि इस अधिवेशन में देश-भर के लगभग १५०० प्रतिनिधि शामिल होंगे। तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ द्वारा किया जाएगा। यह अधिवेशन शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण, सामाजिक मुद्दों, खेल और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित रहेगा।
कार्यक्रम का आयोजन परेड ग्राउंड में किया जा रहा है, जिसे अधिवेशन के लिए भगवान बिरसा मुंडा नगर नाम दिया गया है। उद्घाटन सत्र में एस. सोमनाथ युवाओं को भारत के उभरते वैज्ञानिक, शैक्षिक और तकनीकी परिदृश्य पर संबोधित करेंगे। एबीवीपी पदाधिकारियों ने बताया कि इस अधिवेशन में शिक्षा सुधार, रोजगार अवसरों और राष्ट्रीय विकास में युवाओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी।
एक वरिष्ठ एबीवीपी पदाधिकारी ने कहा, “देवभूमि उत्तराखंड में राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित होना ऐतिहासिक अवसर है। देश के कोने-कोने से आए युवा यहां भविष्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करेंगे।”
सांस्कृतिक यात्राएँ और जनभागीदारी
अधिवेशन से पहले कई सांस्कृतिक यात्राएँ देहरादून पहुंचेंगी। झारखंड से भगवान बिरसा मुंडा संदेश यात्रा और कर्नाटक से रानी अब्बक्का कलश यात्रा शहर में प्रवेश करेंगी। यह यात्रा रानी अब्बक्का की ५००वीं जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही है। इसके अलावा गुरु तेग बहादुर की ३५०वीं शहादत के उपलक्ष्य में उनके बलिदान स्थल का पवित्र जल भी अधिवेशन स्थल पर सम्मान के साथ लाया जाएगा।
अधिवेशन परिसर में महारानी अब्बक्का प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें एबीवीपी के ऐतिहासिक अभियानों, स्वतंत्रता संघर्ष के नायकों, सांस्कृतिक प्रतीकों और जननायकों की भूमिका को दर्शाया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य युवाओं में देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
व्यवस्थाएँ और तैयारी
जिलास्तरीय अधिकारियों और एबीवीपी की राज्य इकाई ने प्रतिनिधियों के आवास, भोजन, सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। अधिकारियों ने बताया कि सभी प्रतिभागियों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण तैयार किया गया है। एक जिला अधिकारी ने कहा, “हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि अधिवेशन में आने वाले सभी प्रतिनिधियों को सुविधाजनक वातावरण मिले और कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक आयोजित हो।”
संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिवेशन उत्तराखंड में युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच, रोजगार के अवसर, जलवायु-संवेदनशील विकास और युवाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर सार्थक चर्चाएँ होने की उम्मीद है।
एक छात्र प्रतिनिधि ने कहा, “यह अधिवेशन हमारे लिए अपनी बात रखने का अवसर है। पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा और रोजगार की चुनौतियों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जरूरी है।”
अधिवेशन के दौरान पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम, विचार-विमर्श सत्र और नीति-मसौदा चर्चाएँ भी होंगी। कार्यक्रम आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन न सिर्फ युवा शक्ति को जोड़ने का माध्यम है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को भी मजबूत करेगा।
देहरादून में २८ नवम्बर से शुरू होने वाले इस अधिवेशन को लेकर तैयारियाँ तेज़ हैं। शहर में उत्साह और उमंग का वातावरण है, और हजारों युवाओं के आगमन से राजधानी में नए जोश और ऊर्जा का संचार होगा।






