देहरादून: राज्य में १५ दिसंबर से शराब पर वैट लागू होने जा रहा है और इसके असर से प्रदेश में विदेशी शराब तथा बीयर समेत विभिन्न मदिरा श्रेणियों की कीमतों में वृद्धि अपेक्षित है। सरकार का तर्क है कि वैट लागू करने से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और मिलने वाली आय का उपयोग सार्वजनिक सुविधाओं और विकास परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।
हमारे संवाददाता के अनुसार राज्य शासन ने इस परिवर्तन की औपचारिक तैयारी पूरी करने के निर्देश विभागों को दे दिए हैं। आबकारी विभाग ने जिलों के आयुक्तों व समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि वे नियत समय से पहले नई कर संरचना के अनुरूप स्टॉक, मूल्य निर्धारण और आपूर्ति श्रृंखला में आवश्यक समायोजन कर लें। अधिकारी यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि उपभोक्ताओं तक नई कीमतें पारदर्शी ढंग से पहुंचें ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
सरकारी तर्क यह है कि शराब बिक्री से मिलने वाला राजस्व राज्य की वित्तीय मजबूती के लिए आवश्यक है। एक वरिष्ठ आबकारी अधिकारी ने कहा, “राज्य के पास विकास कार्यों और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की आवश्यकता है। वैट लागू होने से दीर्घकालिक वित्तीय स्थायित्व सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि उपभोक्ताओं पर असर नियंत्रित रखा जाए।”
दुकानदारों और वितरकों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। देहरादून के एक रिटेल विक्रेता ने कहा, “यदि करभार अधिक हुआ तो कुछ उपभोक्ता सीमावर्ती जिलों से सस्ता विकल्प खोज सकते हैं, फिर भी त्योहारी और शीतकालीन पर्यटन अवधि में मांग में उतनी गिरावट नहीं आएगी।” वहीं एक छोटे वितरक ने चिंता जताई कि अचानक मूल्य वृद्धि से स्टॉक रोटेशन और नकदी प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
उपभोक्ताओं में भी निर्णय को लेकर असंतोष जाहिर हुआ है। राजपुर रोड की एक उपभोक्ता ने कहा, “दैनिक जीवन महंगा हो चुका है, अब शराब पर अतिरिक्त कर और बोझ बनेगा। सरकार को संतुलित और विचारशील वृद्धि करनी चाहिए।” एक अन्य नागरिक ने पूछा कि विशेषता दुकानों तथा बार-रेस्तरां पर इसका क्या प्रभाव होगा और क्या होटल-रजिस्ट्रेशन पर कोई राहत दी जाएगी।
आबकारी विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि १५ दिसंबर से पहले जिलेवार स्टॉक तथा मूल्य सूची का अद्यतन अनिवार्य होगा। दुकानों को निर्देश दिया गया है कि वे उपभोक्ताओं के लिये नई मूल्य सूची साफ-साफ प्रदर्शित करें तथा छूट/प्रमोशन की वर्तमान पॉलिसियों की जानकारी समय पर साझा करें। विभाग ने यह भी कहा कि अवैध परिवहन और सीमा-पार क्रॉस-मार्केटिंग पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि करप्रवर्तन प्रभावी ढंग से लागू हो सके।
पर्यटन के दृष्टिकोण से अधिकारियों का कहना है कि शराब की कीमतों में मामूली वृद्धि से पर्यटन आकर्षण पर गहरा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उत्तराखण्ड में पर्यटक अधिकतर धार्मिक, साहसिक और प्राकृतिक आकर्षण के लिए आते हैं। एक वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी ने बताया, “हमारे आगंतुकों का निर्णय बड़ी हद तक मौसम, सुविधा और अनुभव पर निर्भर करता है। छोटे मूल्य उतार-चढ़ाव का दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहेगा।”
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस कर सुधार को राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के संदर्भ में देखें। अधिकारियों का कहना है कि वैट से प्राप्त अतिरिक्त आय का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अवसंरचना तथा पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में किया जाएगा।
निष्कर्षतः १५ दिसंबर से वैट लागू होने के साथ शराब महंगी होगी, पर सरकार यह भी कह रही है कि वृद्धि नियंत्रित होगी और राज्य हित के लिये दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह बदलाब लागू किया जा रहा है। आगामी सप्ताहों में विभागों की तैयारियों, दुकानदारों की प्रस्तुतियों तथा सार्वजनिक प्रतिक्रिया के आधार पर इसका वास्तविक प्रभाव स्पष्ट होगा।






