चमोली: मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को राज्य के ऊपरी क्षेत्रों में वर्षा और हिमपात की संभावना जताई है, जबकि बदरीनाथ के पास ऋषि गंगा नदी के जमने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तापमान में तेज गिरावट के संकेत मिले हैं। इस मौसम प्रणाली का प्रभाव विशेष रूप से अधिक ऊंचाई वाले जिलों में देखने को मिल सकता है, जहां ठंड का प्रकोप और अधिक बढ़ने की आशंका है।
मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्का से मध्यम हिमपात होने की संभावना है। वहीं निचले क्षेत्रों में शाम और रात के समय वर्षा हो सकती है। यह स्थिति पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण बनी है, जो उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में मौसम को प्रभावित कर रहा है।
बदरीनाथ धाम क्षेत्र के पास ऋषि गंगा नदी का जमना मौसम में आए इस बदलाव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और मंदिर से जुड़े पुरोहितों ने बताया कि आमतौर पर ऐसी स्थिति कड़ाके की सर्दियों में देखने को मिलती है। इस वर्ष दिसंबर के मध्य में ही नदी का जमना ठंड की तीव्रता को दर्शाता है।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि बदरीनाथ, माणा, हेमकुंड साहिब मार्ग और आसपास के गांवों में रात के दौरान तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। कई स्थानों पर पानी की पाइपलाइन, नल और छोटी जलधाराएं जमने लगी हैं। ऊपरी हिमालयी बस्तियों में सुबह के समय तापमान शून्य से नीचे बना हुआ है, जबकि तेज ठंडी हवाओं के कारण ठंड का असर और अधिक महसूस किया जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, साफ रातें और उत्तरी हवाओं की निरंतरता के कारण धरातल से तेजी से ऊष्मा का ह्रास हो रहा है। अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि हिमपात संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें और जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
हमारे संवाददाता आगे बताते हैं कि बदरीनाथ क्षेत्र में तैनात तीर्थयात्री, स्थानीय व्यापारी और सुरक्षा बल अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए विशेष इंतजाम करते दिखाई दिए। अस्थायी आश्रयों को मजबूत किया गया है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त हीटिंग की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने जोशीमठ, माणा और आसपास के सीमावर्ती गांवों को जोड़ने वाली सड़कों की स्थिति की भी समीक्षा की है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि ऊपरी इलाकों में हिमपात के कारण सड़कों पर बर्फ जमने और दृश्यता कम होने से अस्थायी मार्ग अवरोध की स्थिति बन सकती है। जिला प्रशासन को सतर्क रहने और बर्फ हटाने वाले उपकरणों तथा आपातकालीन टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, विशेषकर रणनीतिक मार्गों और सीमावर्ती बस्तियों के आसपास।
यदि पिछले वर्ष के इसी समय की मौसम स्थिति से तुलना की जाए, तो अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष दिसंबर में तापमान में गिरावट अधिक तेज और समय से पहले हुई है। पिछले वर्ष मध्य दिसंबर के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रुक-रुक कर हिमपात हुआ था, लेकिन ऋषि गंगा जैसी नदियों के इस स्तर तक जमने की स्थिति नहीं बनी थी। उस समय मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ था।
मौसम अभिलेखों के अनुसार, पिछले वर्ष दिसंबर के इसी कालखंड में बदरीनाथ में न्यूनतम तापमान शून्य के आसपास बना हुआ था और व्यापक जमाव की स्थिति महीने के अंतिम दिनों में देखने को मिली थी। इस वर्ष, हालांकि, लगातार ठंडे दौर के कारण कई क्षेत्रों में तापमान पहले ही शून्य से नीचे चला गया है, जिससे महाद्वीपीय ठंडी हवाओं का प्रभाव अधिक स्पष्ट हो रहा है।
पिछले वर्ष इस अवधि में वर्षा और हिमपात मुख्य रूप से कमजोर पश्चिमी विक्षोभों से जुड़े थे और उनकी तीव्रता सीमित थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष सक्रिय मौसम प्रणाली अधिक संगठित दिखाई दे रही है, जिसमें नमी युक्त हवाएं ठंडी वायु के साथ टकरा रही हैं। इसके कारण अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी हिमपात की संभावना बढ़ गई है।
जलवायु विशेषज्ञों ने बताया कि हर वर्ष मौसम में होने वाले ऐसे अंतर बड़े पैमाने पर वायुमंडलीय प्रवृत्तियों, जेट स्ट्रीम की स्थिति और पश्चिमी विक्षोभों की आवृत्ति पर निर्भर करते हैं। उनका कहना है कि नदियों का समय से पहले जमना असामान्य नहीं है, लेकिन यह मौसमी बदलावों का एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिस पर निरंतर निगरानी आवश्यक है।
ऋषि गंगा के जमने को लेकर स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति सतही ठंड के कारण उत्पन्न हुई है और इससे फिलहाल किसी प्रकार का जल प्रवाह संबंधी खतरा नहीं है। हालांकि, एहतियात के तौर पर नदी प्रवाह और हिमनदों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग ने बताया कि अगले अड़तालीस घंटों के दौरान ठंड की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऊंचाई वाले इलाकों में रात्रि तापमान में एक से दो डिग्री की और गिरावट आने की संभावना है, जबकि दिन के तापमान भी सामान्य से नीचे बने रह सकते हैं।
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने स्थिति पर सतर्क प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि हिमपात से जहां पहाड़ी क्षेत्रों की सुंदरता बढ़ती है, वहीं अचानक तापमान गिरने से यात्रा और आजीविका पर प्रभाव पड़ सकता है। होटल संचालकों ने बताया कि बुकिंग स्थिर बनी हुई है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के लिए सटीक मौसम जानकारी अत्यंत आवश्यक है।
मौसम विभाग ने कहा कि स्थिति की प्रतिदिन समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार अद्यतन पूर्वानुमान जारी किए जाएंगे। पर्वतीय जिलों के निवासियों को जल आपूर्ति लाइनों, पशुधन और फसलों को पाले से बचाने के उपाय करने की सलाह दी गई है। यात्रियों से भी आग्रह किया गया है कि यात्रा से पहले सड़क और मौसम से संबंधित जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
उत्तराखंड में शीतकाल के मुख्य चरण में प्रवेश के साथ ही अधिकारियों ने कहा कि मौसम एजेंसियों, आपदा प्रबंधन इकाइयों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है, ताकि हिमालयी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की असुविधा और जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।






