देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विंसन पर सफल चढ़ाई पूरी करने वाली पर्वतारोही कविता चंद को हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में इस उपलब्धि को उत्तराखंड और पूरे देश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि कविता की सफलता दृढ़ संकल्प, साहस और देश की बेटियों की अटूट इच्छाशक्ति का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि कविता चंद की यह उपलब्धि उत्तराखंड सहित समस्त देशवासियों को प्रेरणा देती है। उन्होंने उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे कारनामे युवाओं, विशेषकर महिलाओं को बड़े सपने देखने और कठिन चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ करने की प्रेरणा देते हैं।
अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विंसन पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी करने पर उत्तराखंड की बेटी कविता चंद जी को हार्दिक बधाई। आपकी इस उपलब्धि ने उत्तराखण्ड सहित समस्त देशवासियों को गौरवान्वित किया है।
उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएं ! pic.twitter.com/WP95iSkXNJ
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) December 15, 2025
अल्मोड़ा जनपद की निवासी कविता चंद ने १२ दिसंबर को स्थानीय समयानुसार रात ८:३० बजे माउंट विंसन की चोटी पर पहुंचकर भारत के पर्वतारोहण इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। ४,८९२ मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस शिखर पर चढ़ाई उनके लिए प्रतिष्ठित “सेवन समिट्स” चुनौती की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इस वैश्विक चुनौती के अंतर्गत सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर चढ़ाई की जाती है।
वर्तमान में मुंबई में रहने वाली ४० वर्षीय कविता चंद की इस सफलता को विशेष रूप से उनके गृह राज्य उत्तराखंड में गर्व के साथ देखा जा रहा है। अल्मोड़ा की पहाड़ियों से निकलकर दुनिया के सबसे दूरस्थ और कठोर पर्वतीय क्षेत्रों में से एक अंटार्कटिका की चोटी तक का उनका सफर आत्मविश्वास और अनुशासन की मिसाल बन गया है। राज्यभर में पर्वतारोहण प्रेमियों, खेल जगत और फिटनेस समुदाय ने उनकी उपलब्धि की सराहना की है।
माउंट विंसन पर विजय के साथ कविता चंद ने सेवन समिट्स की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है। इससे पहले वह यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर सफल चढ़ाई कर चुकी हैं। अनुभवी पर्वतारोहियों के अनुसार, सेवन समिट्स का लक्ष्य केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा नहीं होता, बल्कि इसमें मानसिक दृढ़ता, मौसम के साथ तालमेल और जटिल लॉजिस्टिक्स की भी कड़ी चुनौती शामिल रहती है।
माउंट विंसन को विश्व की सबसे कठिन चोटियों में गिना जाता है। अंटार्कटिका के दुर्गम क्षेत्र में स्थित यह पर्वत अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं और अप्रत्याशित मौसम के लिए जाना जाता है। यहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और किसी भी आपात स्थिति में सहायता पहुंचना बेहद कठिन होता है। ऐसे वातावरण में पर्वतारोहण के लिए विशेष प्रशिक्षण, उपकरण और सतर्क योजना आवश्यक होती है।
कविता की इस अभियान यात्रा की शुरुआत ३ दिसंबर को भारत से प्रस्थान के साथ हुई। वह ४ दिसंबर को चिली के पुंटा एरेनास पहुंचीं, जिसे अंटार्कटिका अभियानों का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। इसके बाद ७ दिसंबर को उन्होंने यूनियन ग्लेशियर के लिए उड़ान भरी। उसी दिन स्की से लैस विमान में लगभग ४० मिनट की उड़ान के बाद वह लगभग २,१०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित विंसन बेस कैंप पहुंचीं। यह यात्रा अंटार्कटिक अभियानों की जटिलता और जोखिम को दर्शाती है, जहां हर चरण मौसम की अनुकूलता पर निर्भर करता है।
इस अभियान का नेतृत्व प्रसिद्ध उच्च हिमालयी गाइड मिंगमा डेविड शेरपा ने किया। भारतीय दल को अनुभवी पर्वतारोही भरत थम्मिनेनी और उनकी कंपनी ‘बूट्स एंड क्रैम्पॉन’ का सहयोग मिला। इनके मार्गदर्शन में नौ सदस्यीय भारतीय टीम ने सफलतापूर्वक शिखर तक पहुंच बनाई। टीम के सदस्यों ने बताया कि कठोर ठंड और अस्थिर मौसम के बीच सफलता के लिए उचित अनुकूलन, सटीक योजना और निरंतर समन्वय निर्णायक रहा।
अपनी उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कविता चंद ने कहा कि माउंट विंसन की चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराना उनके लिए अवर्णनीय सम्मान का क्षण था। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी यात्रा कामकाजी पेशेवरों, विशेषकर महिलाओं को यह विश्वास दिलाएगी कि महत्वाकांक्षा, शारीरिक फिटनेस और करियर में सफलता साथ-साथ संभव है। उन्होंने कहा कि अनुशासन, धैर्य और सही योजना के साथ कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
पर्वतारोहण के अलावा कविता एक उत्कृष्ट सहनशक्ति धाविका भी हैं। वह दिल्ली और मुंबई हाय्रॉक्स २०२५ प्रतियोगिताओं में अपने आयु वर्ग में विजेता रह चुकी हैं और एबट वर्ल्ड मैराथन मेजर्स सिक्स स्टार चैलेंज की दिशा में तीन मैराथन पूरी कर चुकी हैं। सहनशक्ति खेलों का उनका अनुभव उच्च ऊंचाई पर पर्वतारोहण के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सहायक सिद्ध हुआ।
पूर्व में मीडिया क्षेत्र से जुड़ी रहीं कविता चंद ने २०२४ में अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक फिटनेस को अपनाया। वह इस निर्णय को जीवन बदलने वाला कदम मानती हैं। उन्होंने कई अवसरों पर कहा है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए मानसिक तैयारी, निरंतर अभ्यास और परिवार का समर्थन अत्यंत आवश्यक होता है।
एनपीएसटी के सीईओ और सह-संस्थापक दीपक चंद ठाकुर से विवाह के बाद भी कविता निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। वह उत्तराखंड की अपनी जड़ों को साथ लेकर विश्व की सर्वोच्च चोटियों की ओर अग्रसर हैं। माउंट विंसन पर उनकी सफलता भारतीय महिलाओं की वैश्विक साहसिक खेलों में बढ़ती उपस्थिति का सशक्त प्रतीक बन गई है।
मुख्यमंत्री द्वारा सराही गई यह उपलब्धि उत्तराखंड की पर्वतारोहण परंपरा में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।






