एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत उत्तराखण्ड शहरी विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निकायों को अपने-अपने वार्डों में आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित भोजन स्थलों (Dog Feeding Zones) की स्थापना करने के निर्देश जारी किए हैं। इस कदम का उद्देश्य पशु कल्याण और जनसुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप व्यवस्थाओं को लागू करना है।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतें प्रत्येक वार्ड में कुत्तों को भोजन कराने के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करेंगी। इन स्थानों के चयन में कुत्तों की संख्या, उनकी गतिविधियों का क्षेत्र, और आसपास के संवेदनशील इलाकों—जैसे बच्चों के पार्क या बुजुर्ग केंद्रों—का ध्यान रखा जाएगा। चयनित स्थानों पर स्पष्ट साइनबोर्ड लगाए जाएंगे और स्वच्छता सुनिश्चित की जाएगी। निर्धारित क्षेत्र से बाहर भोजन कराने पर अब कार्रवाई की जाएगी।
हमारे संवाददाता के अनुसार, यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें सभी राज्यों को कुत्तों के भोजन स्थलों को निर्धारित करने, नसबंदी एवं टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्थित भोजन कराने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।
शहरी विकास विभाग ने सभी निकायों को वार्डवार सर्वेक्षण कर आवारा कुत्तों की संख्या, उनके ठिकानों और उपयुक्त भोजन स्थलों की सूची तैयार करने को कहा है। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि ये ज़ोन स्कूलों, अस्पतालों, बच्चों के खेलने के मैदानों और वृद्धजनों के ठहराव स्थलों से दूर बनाए जाएं, ताकि किसी प्रकार की असुविधा या खतरा उत्पन्न न हो।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि यह योजना केवल भोजन स्थलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें आवारा कुत्तों को गोद लेने की व्यवस्था भी शामिल है। इच्छुक व्यक्ति संबंधित शहरी निकाय में आवेदन कर किसी कुत्ते को गोद ले सकेंगे। प्रत्येक गोद लिए गए कुत्ते का पंजीकरण किया जाएगा और उसके टीकाकरण तथा नसबंदी की पुष्टि के बाद ही उसे सुपुर्द किया जाएगा। एक बार गोद लेने के बाद कुत्ते को छोड़ना दंडनीय होगा।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बीमार या आक्रामक कुत्तों को एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) केंद्रों या पशु-देखभाल सुविधाओं में रखा जाएगा, जब तक कि वे सुरक्षित न माने जाएं। विभाग ने सभी शहरी निकायों को अपने-अपने वार्डों की अनुपालन रिपोर्ट तैयार कर राज्य मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह पहल आवारा कुत्तों से जुड़ी शिकायतों को कम करेगी और स्वच्छता, सुरक्षा एवं पशु कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था नागरिकों को जिम्मेदार फीडिंग के लिए प्रोत्साहित करेगी और शहरी क्षेत्रों में भोजन से जुड़ी अव्यवस्थाओं को रोकने में सहायक होगी।
हमारे संवाददाता के अनुसार, इस योजना के तहत प्रत्येक नगर निकाय को नागरिकों के लिए जागरूकता अभियान चलाने होंगे। इनमें लोगों को निर्धारित भोजन स्थलों की जानकारी दी जाएगी, जिम्मेदार भोजन कराने के तरीके बताए जाएंगे, और घायल या बीमार कुत्तों की सूचना देने हेतु हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे।
विभाग ने सभी शहरी निकायों से कहा है कि वे अपनी वेबसाइटों और सूचना पटों पर इन ज़ोनों के स्थान, गोद लेने की प्रक्रिया और संपर्क विवरण साझा करें। साथ ही, नगर निकायों को प्रशिक्षित कर्मचारियों और पशु-प्रेमी संगठनों के साथ मिलकर कुत्तों की निगरानी, टीकाकरण और स्वच्छता सुनिश्चित करनी होगी।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह “मानवीय और दूरदर्शी कदम” है, जो पशुओं के प्रति करुणा और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों की रक्षा करेगा। वहीं कुछ नागरिकों ने नगर निकायों से मांग की है कि वे पर्याप्त डॉग शेल्टर और निगरानी कर्मी नियुक्त करें ताकि व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जा सके।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि शहरी विकास विभाग जल्द ही सभी नगर निकायों में डॉग फीडिंग ज़ोन के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया प्रारंभ करेगा। निकायों से अपेक्षा की गई है कि वे आगामी कुछ सप्ताहों में स्थान तय कर लें और दिसंबर तक योजना का कार्यान्वयन प्रारंभ करें।
यह नीति उत्तराखण्ड में शहरी पशु कल्याण और जनहित को संतुलित करने की दिशा में एक मील का पत्थर मानी जा रही है। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं और झुंड संबंधी घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि आवारा पशुओं के लिए सम्मानजनक देखभाल का वातावरण भी सुनिश्चित होगा।






