हरिद्वार के प्रसिद्ध तीर्थस्थल हर की पौड़ी पर बुधवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया जब तीन महिलाओं के बीच तीखी बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। यह झगड़ा श्रद्धालुओं और राहगीरों के सामने हुआ, जिसका वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
हमारे संवाददाता के अनुसार, तीनों महिलाएं हर की पौड़ी क्षेत्र में तीर्थयात्रियों को तिलक लगाने और धार्मिक सेवाएं देने का कार्य करती हैं। बुधवार दोपहर लगभग दो बजे के आसपास उनके बीच ग्राहकों को लेकर विवाद हो गया। बहस इतनी बढ़ी कि एक महिला ने दूसरी के बाल पकड़ लिए और उसके बाद झगड़ा मारपीट में तब्दील हो गया। आसपास मौजूद श्रद्धालु और स्थानीय लोग इस नजारे को देखकर दंग रह गए।
वीडियो में तीनों महिलाएं एक-दूसरे को धक्का-मुक्की करती नजर आ रही हैं। भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन झगड़ा तब तक उग्र हो चुका था। कुछ ही देर में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों ने इस तरह के व्यवहार पर कड़ी नाराज़गी जताई।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि सूचना मिलने के बाद हर की पौड़ी चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों महिलाओं को पहचानकर थाने बुलाया। पुलिस ने उन्हें धारा 81 पुलिस अधिनियम के तहत चालान किया और सख्त चेतावनी देकर छोड़ दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी महिलाएं स्थानीय निवासी हैं और घाट पर नियमित रूप से कार्य करती हैं।
चौकी प्रभारी संजीत कंडारी ने कहा, “तीनों महिलाओं को चेतावनी दी गई है। उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यदि दोबारा ऐसा व्यवहार हुआ तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हर की पौड़ी जैसे पवित्र स्थल की गरिमा बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।”
पुलिस प्रशासन ने हर की पौड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त गश्त बढ़ाने और CCTV निगरानी को और सशक्त करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि तीर्थ क्षेत्र में महिला पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ाई जाएगी ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने कहा कि घाट पर छोटे व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के बीच अक्सर बहस हो जाती है, लेकिन इस बार मामला पहली बार सार्वजनिक मारपीट तक पहुंच गया। लोगों ने चिंता जताई कि ऐसी घटनाएं तीर्थनगरी की छवि को धूमिल कर सकती हैं।
प्रशासन ने घाट समिति और स्वयंसेवकों को निर्देश दिया है कि वे व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। अधिकारियों ने कहा कि हर की पौड़ी पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए अनुशासन और शांति बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
यह घटना एक बार फिर तीर्थस्थलों पर व्यवस्था और अनुशासन की आवश्यकता को उजागर करती है। प्रशासन ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक वातावरण की पवित्रता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की जानकारी मिले तो तुरंत सूचना दें। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा केवल आस्था से नहीं, बल्कि अनुशासन और जिम्मेदारी से भी जुड़ी होती है।






