असम के मशहूर गायक, संगीतकार और अभिनेता जुबिन गर्ग की आखिरी फिल्म ‘रॉय रॉय बिनाले’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई और पहले ही दिन रिकॉर्ड तोड़ सफलता दर्ज की। फिल्म की रिलीज ने पूरे असम में एक भावनात्मक माहौल बना दिया है। राज्यभर के सिनेमा हॉल्स में सभी शो हाउसफुल हैं और दर्शकों की भारी भीड़ फिल्म देखने के लिए उमड़ पड़ी।
असम में इस फिल्म के 600 से अधिक शो अगले सप्ताह तक निर्धारित किए गए हैं, जो राज्य के सिनेमा इतिहास में एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जा रही है। देशभर में ‘रॉय रॉय बिनाले’ लगभग 92 सिनेमाघरों में 150 से अधिक दैनिक शो के साथ प्रदर्शित की जा रही है। फिल्म देहरादून, लखनऊ, पुणे, जयपुर, कोच्चि, भुवनेश्वर और गोवा जैसे शहरों में भी रिलीज की गई है।
गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ और जोरहाट में सिनेमाघरों के बाहर सुबह चार बजे से ही लंबी कतारें लग गईं। कई प्रशंसक बारिश और ठंड की परवाह किए बिना अपने प्रिय कलाकार को बड़े पर्दे पर आखिरी बार देखने पहुंचे।
फिल्म के निर्माता श्यामंतक गौतम ने बताया कि दर्शकों का उत्साह “अकल्पनीय” है और विदेशों से भी फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए अनुरोध मिल रहे हैं। निर्देशक राजेश भुइयां ने कहा कि यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि “जनता की भावनाओं का प्रतीक” बन चुकी है।
फिल्म में जुबिन गर्ग एक अंधे कलाकार की भूमिका में हैं। इसमें उनकी आवाज़ के मूल रिकॉर्डिंग्स को सुरक्षित रखा गया है, ताकि यह फिल्म उनके कला-संगीत के प्रति समर्पण को श्रद्धांजलि दे सके। यह फिल्म जुबिन का लगभग 19 वर्षों का सपना थी, जिसे उन्होंने अपने जीवनकाल में पूरा करने की योजना बनाई थी। उनका निधन 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में हुआ था, जिसके बाद यह फिल्म और भी भावनात्मक महत्व रखती है।
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि इस फिल्म से प्राप्त होने वाले जीएसटी राजस्व को ‘कलागुरु आर्टिस्ट फाउंडेशन’ को दान किया जाएगा। यह संस्था कलाकारों, बाढ़ प्रभावितों और जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता करती है और जुबिन गर्ग की स्मृति से गहराई से जुड़ी है।
असम के सिनेमाघर मालिकों ने बताया कि फिल्म के सभी शो पहले सप्ताह के लिए पूरी तरह बुक हो चुके हैं। गुवाहाटी के कुछ मल्टीप्लेक्सों में अतिरिक्त मिडनाइट शो की व्यवस्था की गई है। यह फिल्म अब केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान और भावनात्मक एकता का प्रतीक बन गई है।
राज्यभर में फिल्म की रिलीज को लेकर जश्न का माहौल है। कई स्थानों पर दर्शकों ने थिएटर के बाहर फूलों की वर्षा की, पोस्टर सजाए और जुबिन गर्ग के गीतों पर नृत्य किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग ने इसे श्रद्धांजलि के रूप में देखा।
फिल्म ‘रॉय रॉय बिनाले’ की सफलता को असमिया सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इसकी रिलीज केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर हुई है, जिससे असमिया फिल्मों के बाजार और पहचान को नई ऊंचाई मिली है।
आलोचकों का मानना है कि यह फिल्म जुबिन गर्ग के जीवन और कला दोनों का उत्सव है। उनके संगीत, अभिनय और संवेदनशीलता ने असम और उत्तर-पूर्व के दर्शकों पर जो प्रभाव डाला, वह इस फिल्म की सफलता में साफ झलकता है।
पहले सप्ताह के दौरान टिकटों की रिकॉर्ड बुकिंग के साथ यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगातार नया इतिहास लिख रही है। आने वाले दिनों में यह देखना रोचक होगा कि भावनात्मक लहर के साथ यह व्यावसायिक सफलता कितनी आगे जाती है।
फिलहाल, ‘रॉय रॉय बिनाले’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक विदाई है — उस कलाकार को, जिसने असम की आत्मा को अपने संगीत और अभिनय के माध्यम से जीवंत कर दिया।






