उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य को अंडे और चिकन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मुर्गीपालन विकास नीति 2025 (मुर्गीपालन नीति 2025) को मंजूरी दे दी है। इस नई नीति के तहत राज्य में अगले पांच वर्षों में उत्पादन, निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में अंडे और चिकन की बढ़ती मांग को पूरा करना है। वर्तमान में उत्तराखण्ड में हर साल लगभग 15 लाख अंडों और 395 लाख किलोग्राम चिकन मांस की मांग है। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने 35 अंडा उत्पादन इकाइयों और 19 ब्रॉयलर (चिकन मांस) फार्मों की स्थापना का निर्णय लिया है। इस नीति से लगभग 85 करोड़ रुपये के निजी निवेश की संभावना जताई गई है।
राज्य सरकार ने निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए उदार सब्सिडी व्यवस्था लागू की है। पर्वतीय क्षेत्रों में निवेशकों को 40 प्रतिशत और मैदानी क्षेत्रों में 30 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी। इस योजना के तहत कुल 29.09 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि का प्रावधान किया गया है।
नीति के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्रों में अंडा उत्पादन इकाइयों के लिए प्रति इकाई 48 लाख रुपये और ब्रॉयलर इकाइयों के लिए 56 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। वहीं मैदानी क्षेत्रों में अंडा उत्पादन इकाइयों को 45 लाख रुपये और ब्रॉयलर इकाइयों को 63 लाख रुपये प्रति इकाई सहायता दी जाएगी।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि इस नीति के माध्यम से अगले पांच वर्षों में राज्य में 4,500 लोगों को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित होंगे तथा राज्य अन्य राज्यों से अंडे और मांस की आपूर्ति पर निर्भरता से मुक्त होगा।
पशुपालन सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम ने बताया कि इस नीति के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में 18 कमर्शियल लेयर फार्म और 10 ब्रॉयलर फार्म, जबकि मैदानी इलाकों में 17 कमर्शियल लेयर फार्म और 9 ब्रॉयलर फार्म स्थापित किए जाएंगे। ये इकाइयाँ आधुनिक तकनीक और बेहतर फीड प्रबंधन के साथ चलाई जाएंगी।
राज्य सरकार के अनुसार, 2022-23 में उत्तराखण्ड में अंडा उत्पादन लगभग 5,413 लाख इकाइयों का था, जबकि राज्य में कुल आवश्यकता 20,857 लाख इकाइयों की है। इसी तरह, चिकन मांस उत्पादन में भी राज्य आत्मनिर्भर नहीं है। इसलिए, इस नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करने की आवश्यकता महसूस की गई।
नीति में कहा गया है कि राज्य में मुर्गीपालन को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) नीति से जोड़ा जाएगा, ताकि छोटे किसान और उद्यमी भी इस योजना का लाभ उठा सकें। इसके साथ ही, फार्मों की स्थापना के लिए बैंकिंग सहयोग और सरकारी गारंटी सहायता की भी व्यवस्था की जाएगी।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि नीति का कार्यान्वयन पांच वर्षों के लिए मान्य रहेगा। इस अवधि में निगरानी, प्रोत्साहन और विपणन सहायता जैसी व्यवस्थाओं को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार नीति की सफलता सुनिश्चित करने के लिए क्लस्टर-आधारित विकास मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है।
2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान कई निवेशकों ने उत्तराखण्ड में मुर्गीपालन क्षेत्र में निवेश की इच्छा जताई थी। अब जब नीति को औपचारिक स्वीकृति मिल गई है, तो इन प्रस्तावों को तेज़ी से आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
यह नीति न केवल उत्पादन को बढ़ाएगी, बल्कि कृषि और पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल युवाओं को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक मुर्गीपालन अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।
नीति में स्वच्छता, जैव-सुरक्षा (बायो सिक्योरिटी) और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, फीड उपलब्धता, ठंड श्रृंखला (कोल्ड चेन) और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
यह नीति उत्तराखण्ड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में राज्य अंडे और चिकन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनकर देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेगा।






