हरिद्वार जिले में प्रशासन ने सुमन नगर क्षेत्र में स्थित सरकारी जमीन पर बने एक अवैध मज़ार को मंगलवार को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई राज्य सरकार के अतिक्रमण विरोधी अभियान के अंतर्गत की गई, जिसके दौरान पुलिस बल की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि यह धार्मिक ढांचा लगभग दो बीघा जमीन पर बना था, जो उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की संपत्ति है। यह क्षेत्र रानीपुर थाने के अंतर्गत आता है। प्रशासन ने पहले अतिक्रमणकर्ताओं को नोटिस जारी किया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा तक उन्होंने ढांचा नहीं हटाया। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने मंगलवार सुबह मौके पर पहुंचकर विध्वंस की कार्रवाई शुरू की।
एसडीएम जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने यह अभियान चलाया। कार्रवाई से पहले धार्मिक सामग्रियों और वस्तुओं को सम्मानपूर्वक हटाया गया। इसके बाद जेसीबी मशीन की मदद से पूरी संरचना को ध्वस्त किया गया।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि कार्रवाई शांतिपूर्वक संपन्न हुई और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि केवल सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के उद्देश्य से की गई है।
जानकारी के अनुसार, यह भूमि पूर्व में कृषि उपयोग के लिए पट्टे पर दी गई थी, लेकिन बिना अनुमति के इस पर धार्मिक ढांचा बना लिया गया था। स्थानीय निवासियों की शिकायत और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की।
स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ ने इसे सही कदम बताते हुए कहा कि अतिक्रमण से रास्ता बाधित हो गया था और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि धार्मिक पक्षों से संवाद किया जाना चाहिए था।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि जिला अधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी भूमि का पुनः सर्वेक्षण करें और अन्य अवैध कब्जों की पहचान करें। विशेष रूप से सड़क, नहर और सार्वजनिक मार्गों के आसपास की जमीनों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे वह व्यावसायिक हो, आवासीय या धार्मिक स्वरूप का। दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी और अतिक्रमण हटाने की लागत भी उन्हीं से वसूली जाएगी।
प्रशासन ने यह भी कहा कि लोग अपने धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति आवश्यक है। सरकारी जमीन पर बिना अनुमति निर्माण करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि यह कार्रवाई राज्यभर में चल रहे उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की संभावना है।
हरिद्वार प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें और अवैध निर्माण से बचें। प्रशासन ने कब्जा मुक्त कराई गई भूमि को संबंधित विभागों को सार्वजनिक उपयोग के लिए हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष में यह कार्रवाई उत्तराखंड सरकार के पारदर्शिता और सुशासन के संकल्प को पुनः रेखांकित करती है।






