देहरादून के रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुनानक जयंती एवं कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मत्था टेका। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेष रूप से सिख समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और गुरु नानक देव जी के उपदेशों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि मुख्यमंत्री श्री धामी सुबह गुरुद्वारे पहुंचे, जहां गुरुद्वारा प्रबंधक समिति और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान गुरुद्वारे में विशेष अरदास आयोजित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। वातावरण में भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनियां गूंज रही थीं और पूरा परिसर भक्ति और शांति के भाव से ओतप्रोत था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन से समाज को समानता, भाईचारे और सेवा का संदेश दिया। उन्होंने समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने और इंसानियत को सर्वोच्च मानने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी का जीवन दर्शन आज भी प्रासंगिक है और हमें समाज में एकता व सद्भाव की भावना को मजबूत करने का मार्ग दिखाता है।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि गुरुनानक जयंती, जिसे गुरुपरब के नाम से भी जाना जाता है, सिख धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। यह गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिनका जन्म सन् 1469 में ननकाना साहिब (अब पाकिस्तान में) हुआ था। गुरु नानक देव जी ने ‘एक ओंकार’ के सिद्धांत पर बल दिया, जो विश्व में एक ईश्वर और सभी मनुष्यों की समानता का प्रतीक है।
इस अवसर पर गुरुद्वारे को आकर्षक रूप से सजाया गया था। दीयों, फूलों और रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा। श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही गुरुद्वारे में जुटने लगी थी। उन्होंने अरदास की और गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका। गुरुपरब के उपलक्ष्य में आयोजित लंगर में श्रद्धालुओं को प्रसाद और भोजन परोसा गया।
गुरुनानक जयंती पर दो दिन पहले से ही ‘अखंड पाठ’ का आयोजन किया जाता है, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब का निरंतर पाठ होता है। मुख्य दिवस पर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं और कीर्तन दरबारों में भक्तजन भक्ति गीत गाते हैं। इस दिन दान, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को सर्वोच्च पुण्य माना जाता है।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि देहरादून के अलावा हरिद्वार, रुड़की, रुद्रपुर और हल्द्वानी के गुरुद्वारों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। हजारों श्रद्धालु गुरुनानक देव जी के जन्म उत्सव में शामिल हुए। जगह-जगह निशुल्क लंगर लगाए गए और श्रद्धालुओं ने सेवा के माध्यम से गुरु जी की शिक्षाओं को आत्मसात किया।
मुख्यमंत्री ने सिख समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सिख समाज हमेशा सेवा और मानवता की भावना के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि कोविड काल के दौरान भी सिख संस्थाओं ने मानवता की मिसाल कायम की थी। उन्होंने कहा कि सेवा और परोपकार का यह भाव ही गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का सार है।
उन्होंने कहा कि “गुरु नानक देव जी ने सिखाया कि सच्ची पूजा वही है जो दूसरों के दुख दूर करे। उनकी वाणी — ‘नाम जपो, किरत करो, वंड छको’ — आज भी हमें जीवन का आदर्श मार्ग दिखाती है।” मुख्यमंत्री ने राज्य और देशवासियों के सुख, समृद्धि और एकता की कामना करते हुए गुरु नानक देव जी के आशीर्वाद की प्रार्थना की।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि गुरुद्वारे में आयोजित कार्यक्रम का समापन शाम की अरदास और सामूहिक कीर्तन से हुआ। श्रद्धालुओं ने दीप जलाए और गुरु जी की शिक्षाओं पर चलने का संकल्प लिया। देहरादून के प्रमुख नागरिकों, समाजसेवियों और अधिकारियों ने भी इस अवसर पर उपस्थित रहकर श्रद्धा व्यक्त की।
यह आयोजन न केवल सिख समुदाय की धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि यह समाज में भाईचारा, एकता और सेवा की भावना को सशक्त करने का प्रेरक उदाहरण भी बना।






