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पौड़ी में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान से पेंशनभोगियों को राहत

भारत सरकार के पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा शुरू किया गया डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) अभियान 4.0 उत्तराखंड के पेंशनभोगियों, विशेष रूप से पौड़ी गढ़वाल में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है। इस अभियान के तहत जिले में कई स्थानों पर शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

हमारे संवाददाता के अनुसार, 1 नवंबर से शुरू हुआ यह राष्ट्रव्यापी अभियान 30 नवंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य पेंशनभोगियों को फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक सहित डिजिटल माध्यमों से अपने जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की सुविधा प्रदान करना है।

पोस्ट पेमेंट्स बैंक प्रधान डाकघर, पौड़ी और भारतीय स्टेट बैंक की पौड़ी, श्रीनगर गढ़वाल, बेस अस्पताल, एचएनबी श्रीनगर, सतपुली और कोटद्वार शाखाओं में विशेष शिविर आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में पेंशनभोगियों ने भाग लिया। यह पहल दूरस्थ क्षेत्रों के पेंशनभोगियों को भी डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि 2021 में शुरू की गई आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के उपयोग से अब पेंशनभोगी केवल एक स्मार्टफोन के माध्यम से घर बैठे ही अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) ने अति वरिष्ठ और दिव्यांग पेंशनभोगियों के लिए डोरस्टेप डीएलसी सेवा शुरू की है, जबकि बैंक, पेंशनभोगी संघ और क्षेत्रीय कार्यालय जागरूकता शिविरों के माध्यम से पेंशनभोगियों को डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ रहे हैं।

अभियान के दौरान, श्री लालता प्रसाद पाल, सलाहकार, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग, भारत सरकार, ने 6 नवंबर को पौड़ी, श्रीनगर गढ़वाल, बेस अस्पताल, एचएनबी श्रीनगर, सतपुली और कोटद्वार स्थित शिविरों का निरीक्षण किया। उन्होंने पेंशनभोगियों से बातचीत की और फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और एसबीआई अधिकारियों के साथ चर्चा कर यह सुनिश्चित करने के उपायों पर बल दिया कि प्रत्येक पेंशनभोगी तक यह डिजिटल सुविधा पहुंचे।

वर्ष 2024 में आयोजित डीएलसी 3.0 में 1.62 करोड़ से अधिक डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जनरेट किए गए थे, जिनमें से लगभग 50 लाख फेस ऑथेंटिकेशन से किए गए। इस वर्ष बैंक, आईपीपीबी, यूआईडीएआई, मेटी, सीजीडीए, रेलवे और पेंशनभोगी कल्याण संघों के सहयोग से 2 करोड़ प्रमाण पत्र का लक्ष्य रखा गया है।

अभियान के माध्यम से सरकार का उद्देश्य डिजिटल इंडिया की भावना को सशक्त बनाना और वरिष्ठ नागरिकों को प्रौद्योगिकी के माध्यम से सशक्त बनाना है। फेस ऑथेंटिकेशन सुविधा ने इस प्रक्रिया को सरल और सुलभ बना दिया है, जिससे वृद्ध और दिव्यांग पेंशनभोगियों को कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं रही।

अधिकारियों ने बताया कि ऐसी डिजिटल पहलें न केवल पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ा रही हैं बल्कि नागरिक-हितैषी शासन की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। पेंशनभोगियों ने इस पहल को “सेवानिवृत्त नागरिकों के लिए डिजिटल क्रांति” बताया।

विभाग ने कहा कि वह भविष्य में भी तकनीक-संचालित योजनाओं के माध्यम से पेंशनभोगियों के जीवन को और सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान 4.0 धीरे-धीरे भारत के वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे प्रभावशाली और समावेशी डिजिटल अभियानों में से एक बनता जा रहा है।

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