होमउत्तराखंडदेहरादून एयरपोर्ट पर सुखोई आपात लैंडिंग, कोई जनहानि नहीं

देहरादून एयरपोर्ट पर सुखोई आपात लैंडिंग, कोई जनहानि नहीं

सुखोई आपात लैंडिंग 

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सुखोई-३०एमकेआई लड़ाकू विमान ने मध्य उड़ान में तकनीकी खराबी आने के बाद देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर आपात लैंडिंग की। यह विमान बरेली से उड़ान भरने के कुछ समय बाद तकनीकी समस्या के कारण देहरादून की ओर मोड़ा गया। रक्षा और हवाई अड्डा अधिकारियों ने पुष्टि की कि विमान ने सुरक्षित लैंडिंग की और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

हमारे संवाददाता बताते हैं कि उड़ान भरने के कुछ समय बाद पायलट ने एक इंजन से तेल रिसाव देखा और तुरंत वायु यातायात नियंत्रण कक्ष को इसकी जानकारी दी। नियंत्रण कक्ष ने तुरंत आपात लैंडिंग की अनुमति दी और रनवे को खाली कर दिया गया। आपात दल और तकनीकी कर्मियों को एहतियातन तैनात कर दिया गया ताकि स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।

विमान ने सुरक्षित रूप से लैंडिंग की और उसे नागरिक उड़ानों से दूर एक सुरक्षित क्षेत्र में खड़ा किया गया। ग्राउंड इंजीनियरों और वायुसेना तकनीशियनों ने विमान की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी। हवाई अड्डा अधिकारियों ने बताया कि पूरी घटना के दौरान जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर नागरिक उड़ानें सामान्य रूप से जारी रहीं।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि बरेली वायुसेना स्टेशन से विशेषज्ञों की एक टीम देहरादून भेजी गई, जिसने तकनीकी जांच में सहयोग किया। प्रारंभिक जांच में तेल संचार प्रणाली में गड़बड़ी की संभावना जताई गई है, हालांकि वायुसेना की विस्तृत जांच जारी है। एक औपचारिक जांच बोर्ड तकनीकी खराबी के सटीक कारण का निर्धारण करेगा।

हवाई अड्डा निदेशक भूपेश सी. एच. नेगी ने कहा कि सभी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया गया और रक्षा एवं नागरिक टीमों के बीच बेहतर तालमेल के कारण स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित रखा गया। उन्होंने बताया कि किसी भी यात्री, चालक दल या कर्मचारी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

हमारे संवाददाता बताते हैं कि पायलट के त्वरित निर्णय और आपात प्रोटोकॉल के पालन से एक संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। भारतीय वायुसेना ने पायलट और चालक दल की पेशेवर दक्षता की सराहना की और देशभर के सुखोई विमानों की एहतियाती जांच के निर्देश दिए।

विशेषज्ञों ने बताया कि देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट नागरिक और सैन्य दोनों प्रकार की उड़ानों के लिए उपयुक्त संरचना रखता है। उन्होंने कहा कि ऐसे दोहरे उपयोग वाले हवाई अड्डों पर नागरिक उड्डयन और रक्षा इकाइयों के बीच लगातार तालमेल बेहद आवश्यक है।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि हिमालयी तलहटी के समीप स्थित देहरादून का भौगोलिक क्षेत्र विमानन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तो है, परन्तु चुनौतीपूर्ण भी है। यहां की ऊँचाई, मौसम और दबाव में तेजी से बदलाव पायलटों और इंजीनियरों के लिए अतिरिक्त सावधानी की मांग करते हैं।

प्रशासन ने बताया कि सुखोई विमान को जांच पूर्ण होने तक सेवा से बाहर रखा जाएगा। इस घटना ने फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि सैन्य विमानन में नियमित रखरखाव और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली कितनी आवश्यक है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Uttarakhand Government

Most Popular

Recent Comments