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२०२६ से उत्तराखंड वर्चुअल प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन होगा लागू

उत्तराखंड वर्चुअल प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन

राज्य में शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में वर्चुअल प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को इस परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें उन्होंने निर्धारित समयसीमा के भीतर इसके क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

हमारे संवाददाता बताते हैं कि बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि भूमि एवं परिसंपत्तियों के क्रय-विक्रय का वर्चुअल रजिस्ट्रेशन शुरू होने से व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, समय की बचत होगी और विवादों में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि इस कार्य में सभी संबंधित विभागों, एजेंसियों और निकायों के बीच समन्वय आवश्यक है ताकि परियोजना समय पर पूर्ण हो सके।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पोर्टल या एप्लीकेशन में ऐसा प्रावधान किया जाए जिससे सभी आवश्यक दस्तावेज विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच स्वतः और पेपरलेस प्रक्रिया से साझा किए जा सकें। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल प्रणाली दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाएगी।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि मुख्य सचिव ने कहा कि इस प्रणाली के लागू होने से भूमि अभिलेखों का एक समान और सटीक रिकॉर्ड सभी विभागों और एजेंसियों के पास उपलब्ध रहेगा, जिससे त्रुटियों और विवादों में कमी आएगी।

बैठक में अधिकारियों ने अवगत कराया कि वर्चुअल रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन तैयार हो चुकी है और बैठक में प्राप्त सुझावों के अनुसार उसमें कुछ संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद परियोजना के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

हमारे संवाददाता बताते हैं कि इस नई प्रणाली में भूमि पंजीकरण के तीन विकल्प उपलब्ध रहेंगे—
१. भौतिक पंजीकरण: आवेदक दस्तावेजों सहित रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होंगे।
२. पेपरलेस पंजीकरण: आवेदक बिना किसी भौतिक दस्तावेज़ के रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होकर पंजीकरण कर सकेंगे।
३. वर्चुअल पंजीकरण: आवेदक बिना किसी मध्यस्थ के पूर्णतः ऑनलाइन माध्यम से भूमि की रजिस्ट्री कर सकेंगे।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस प्रणाली को १ अप्रैल २०२६ से राज्यभर में लागू करने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उत्तराखंड में डिजिटल शासन की दिशा में एक बड़ा कदम होगी, जिससे दक्षता और पारदर्शिता में वृद्धि होगी।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य जनता को तेज, पारदर्शी और विवाद-मुक्त पंजीकरण प्रणाली उपलब्ध कराना है ताकि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पूर्णतः डिजिटल रूप में विकसित हो सके।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव श्रीमती सोनीका और आलोक कुमार पांडेय, सहायक महानिरीक्षक निबंधक अतुल शर्मा, उपसचिव सुनील सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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