केंद्रीय जांच ब्यूरो ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के सहयोग से वांछित भगोड़ा जगदीश पुनेठा की संयुक्त अरब अमीरात से १३ नवम्बर को वापसी का समन्वय किया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह कार्रवाई कई एजेंसियों के बीच कूटनीतिक, कानूनी और जांच संबंधी प्रक्रियाओं के तहत पूरी की गई।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि आरोपी के विरुद्ध मामला उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष २०२१ में पिथौरागढ़ थाने में दर्ज किया था। प्रकरण में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी भारत से बाहर चला गया था और उसकी गतिविधियां विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से ही चिन्हित हो सकीं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उत्तराखंड पुलिस के अनुरोध पर ०६ मई, २०२५ को अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन के माध्यम से रेड नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया पूरी की थी। हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि यह नोटिस दुनिया भर की एजेंसियों को सतर्क करता है और वांछित व्यक्तियों का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अधिकारियों ने बताया कि नोटिस जारी होने के बाद आरोपी की मौजूदगी संयुक्त अरब अमीरात में पुष्टि हुई। वहां की स्थानीय एजेंसियों ने औपचारिक सत्यापन के बाद उसे हिरासत में लिया। उसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी और भारत सरकार को आवश्यक सूचना प्राप्त हुई।
इसके बाद उत्तराखंड पुलिस की एक टीम संयुक्त अरब अमीरात रवाना हुई। टीम ने वहां की एजेंसियों के साथ सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और आवश्यक दस्तावेज सत्यापित होने के बाद आरोपी को अपने सुपुर्द लिया। दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उसे नई दिल्ली लाया गया।
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उसकी वापसी के बाद एक विस्तृत बयान जारी किया। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि भारत के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में वह अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन के साथ सभी संचारों का समन्वय करती है। इसके अतिरिक्त वह भारत के विभिन्न राज्यों की पुलिस को भरतपोल तंत्र के माध्यम से सहयोग प्रदान करती है, जिससे सीमापार मामलों में संरचित सूचना का आदान प्रदान संभव हो पाता है।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इस प्रकार के सहयोग से १५० से अधिक वांछित व्यक्तियों को भारत वापस लाया गया है। ऐसे मामलों में कई देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय, कानूनी औपचारिकताएं और कूटनीतिक प्रक्रियाएं शामिल रहती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करती है और राज्य एजेंसियों को मामलों की जांच आगे बढ़ाने में सहायता प्रदान करती है।
विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने भी इस पूरी प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग दिया। दोनों मंत्रालयों की भूमिका सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों और दिशानिर्देशों के अनुरूप रही। अधिकारियों ने कहा कि सभी चरण निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार पूरे किए गए।
उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि आरोपी की वापसी के बाद जांच प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश करेगी। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों की पुनर्समीक्षा करेगी, आवश्यक बयान दर्ज करेगी और आगे की कानूनी कार्यवाहियों को पूरा करेगी। अधिकारियों ने कहा कि पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा और सभी प्रक्रियाएं न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होंगी।
पिथौरागढ़ में दर्ज मामले के लिए यह विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह घटना दर्शाती है कि राष्ट्रीय एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से जटिल मामलों को आगे बढ़ाने में सक्षम हैं। अधिकारी कहते हैं कि शेष औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच विधिसम्मत रूप से जारी रहेगी।






