चमोली के गौचर मैदान में राज्य की संस्कृति और स्थानीय विकास को प्रदर्शित करने वाला ७३वां राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला (गौचर मेला) शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्घाटन किया। १४ नवम्बर से शुरू होकर एक सप्ताह तक चलने वाला यह मेला लोक संस्कृति और व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख संगम माना जाता है।
मुख्यमंत्री धामी ने मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने के साथ स्थानीय आर्थिकी को भी सशक्त बनाते हैं। हमारे संवाददाता बताते हैं कि उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, अधिकारी और आसपास के क्षेत्रों से आए आगंतुक उपस्थित रहे। गौचर वर्षों से उत्तराखंड के प्रमुख सांस्कृतिक केन्द्रों में से एक रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेला क्षेत्रीय विरासत को बढ़ावा देने और कारीगरों, कलाकारों तथा छोटे उत्पादकों को मंच उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक निरंतरता बनाए रखते हैं और स्थानीय समुदायों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में कई राष्ट्रीय पहलों से स्थानीय उद्योगों को लाभ मिला है। हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि घरेलू उद्योगों से जुड़ी अनेक महिलाएं आज उल्लेखनीय प्रगति कर रही हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ की तर्ज पर गौचर में १८ सीटर हेलीसेवा शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह सेवा स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही को बेहतर बनाएगी। उन्होंने नगर क्षेत्र में चार प्रमुख स्थानों पर पार्किंग सुविधाओं के विकास की भी पुष्टि की, जिससे बड़े आयोजनों के दौरान यातायात सुचारू रखा जा सके।
मुख्यमंत्री ने साकेत नगर, रघुनाथ मंदिर और चटवापीपल को जोड़ने वाले मोटर मार्ग के निर्माण की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि गौचर में नये स्टेडियम निर्माण हेतु धनराशि स्वीकृत कर दी गई है और निर्माण कार्य शीघ्र प्रारम्भ किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि ये परियोजनाएं स्थानीय आधारभूत संरचना को मजबूत करेंगी और सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों को बढ़ावा देंगी।
उद्घाटन समारोह में दो विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार हरीश मैखुरी को गोविन्द प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान प्रदान किया गया। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु डॉ. नन्द किशोर हटवाल को महेशानंद नौटियाल शिक्षा एवं साहित्य प्रसार सम्मान से सम्मानित किया गया।
मेले का पहला दिन पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ शुरू हुआ। सुबह ईष्ट रावल देवता की पूजा की गई, जिसके बाद स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली। मेला समिति द्वारा ध्वजारोहण किया गया तथा मार्चपास की सलामी ली गई। मुख्य मेला द्वार से चटवापीपल पुल तक और वापस उसी मार्ग से क्रॉस कंट्री दौड़ का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया।
खेल और सांस्कृतिक गतिविधियाँ दिन भर जारी रहीं। बालकों और बालिकाओं की दौड़ प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। नेहरू चित्रकला प्रतियोगिता, शिशु प्रदर्शनी और शिक्षण संस्थानों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ विशेष आकर्षण रहीं। पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय खाद्य उत्पादों के स्टॉलों पर आगंतुकों की भारी भीड़ उमड़ी।
पहली सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध लोकगायिका डॉ. पम्मी नवल द्वारा जागर संध्या प्रस्तुत की जाएगी। आयोजकों ने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शकों के शामिल होने की संभावना है। स्थानीय डिजाइन और पर्वतीय पारंपरिक शैली से सजा मुख्य पांडाल आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।
क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने कहा कि घोषित विकास योजनाएं क्षेत्र की पुरानी समस्याओं के समाधान में सहायक सिद्ध होंगी।
मेला सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और आर्थिक सहभागिता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करता है। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाएँगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के कार्यक्रम मेले की पुरानी विरासत को आगे बढ़ाने और व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।






