अल्मोड़ा वनाग्नि
अल्मोड़ा के पांडेखोला क्षेत्र में शनिवार देर रात मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय के पीछे जंगल में अचानक आग लगने से आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना शाम लगभग ८ बजकर ०५ मिनट पर सामने आई, जब स्थानीय निवासियों ने धुआं उठता देखा और तुरंत फायर स्टेशन को सूचना दी। सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेजी से कार्रवाई करते हुए आग को फैलने से रोक दिया। त्वरित कार्रवाई के चलते किसी बड़ी जनहानि या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि आग जंगल के भीतर तेजी से फैल रही थी और कुछ ही समय में यह आबादी की ओर भी बढ़ने लगी। स्थानीय लोग स्थिति को गंभीर होते देख तुरंत सतर्क हो गए और आसपास के घरों को खाली कराने की तैयारी भी शुरू कर दी। सूचना मिलते ही अग्निशमन केंद्र पांडेखोला से एक फायर यूनिट तत्काल मौके के लिए रवाना की गई। स्टेशन अधिकारी नरेंद्र सिंह कुंवर के नेतृत्व में टीम ने पहुँचते ही आग बुझाने का अभियान शुरू किया।
अग्निशमन विभाग के अनुसार, आग पर काबू पाने के लिए एमएफएम मशीन और एकल होज रील का उपयोग किया गया। हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि लगभग दो घंटे तक चले अभियान के बाद आग पूरी तरह से नियंत्रित कर ली गई। अभियान में शामिल कर्मियों में चालक गिरीश धारीयाल, फायरमैन हरी सिंह, रवि आर्या, जीवन जोशी, स्वाति बोहरा, इंदु मेहता और रिजर्व फायरमैन प्रियांशु कुमार शामिल थे।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि आग की लपटें काफी ऊंची थीं और यदि टीम समय पर नहीं पहुंचती, तो आसपास की बस्तियां इसके दायरे में आ सकती थीं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि कुछ ही मिनटों में यह घरों तक पहुंच सकती थी। फायर टीम ने समय रहते सब संभाल लिया।”
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सर्दी के मौसम में पत्तियों और घास के सूख जाने से जंगल में आग लगने की घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में ऐसे मामलों को रोकने के लिए निगरानी और गश्त बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन मानवीय लापरवाही को नकारा नहीं जा सकता।
अभियान पूरा करने के बाद फायर यूनिट को वापस लौटते समय पानी की पुनःभराई के लिए पातालदेवी वॉटर स्टेशन भेजा गया। इसके बाद यूनिट अल्मोड़ा फायर स्टेशन लौटी और घटना से संबंधित रिपोर्ट तैयार की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं पर्यावरण को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा सकती हैं। आग लगने से वन संपदा के साथ-साथ पक्षियों और छोटे वन्यजीवों के आवास पर भी खतरा बढ़ जाता है। विभाग ने अपील की है कि स्थानीय निवासी किसी भी प्रकार की आग या धुएं की सूचना तुरंत फायर सर्विस को दें ताकि समय रहते नियंत्रण पाया जा सके।
जिला प्रशासन ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि आग के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा उपायों को और सख्त किया जाएगा।
अल्मोड़ा नगर और आसपास के क्षेत्रों में वनाग्नि की यह घटना हाल के दिनों की प्रमुख घटनाओं में से एक है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जंगल में आग लगने से रोकने के उपाय बताए जाएंगे। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयंसेवी समूहों को भी वनाग्नि नियंत्रण एवं राहत कार्यों में सम्मिलित करने पर विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि विभाग की समयबद्ध प्रतिक्रिया ने बड़ी दुर्घटना होने से बचा लिया। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य है और आग से प्रभावित हिस्सों की निगरानी जारी है।






