देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में बिल लाओ इनाम पाओ योजना के विजेताओं को सम्मानित किया। इस योजना का संचालन १ सितम्बर २०२२ से ३१ मार्च २०२४ तक किया गया, जिसके दौरान उपभोक्ताओं ने भारी संख्या में प्रतिभाग किया और कुल १८८८ उपभोक्ताओं ने विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार जीते। मुख्यमंत्री ने विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह योजना राज्य में उपभोक्ता जागरूकता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना ने राज्य में उपभोक्ता जागरूकता, पारदर्शिता, और राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया में जनसहभागिता को एक नया रूप दिया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बिल प्रदेश के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान है और यह समझ अब जनसाधारण के बीच गहराई से विकसित हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन वर्षों में इस योजना ने पारदर्शी लेनदेन के प्रति जनता में नई चेतना विकसित की है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ११ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार, उद्यम और नवाचार के क्षेत्र में नया विश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने व्यापारियों को प्रोत्साहन, प्रॉफिट, और प्रोटेक्शन तीनों उपलब्ध कराए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और व्यापार सुधार कार्य योजना के माध्यम से निवेश और उद्यमिता के अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में राजकोषीय अनुशासन को मजबूती से लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य ने निर्धारित सीमा के भीतर राजकोषीय घाटा रखने में सफलता पाई है, जिसके लिए उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अरुण जेटली नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट की हालिया रिपोर्ट में उत्तराखंड को देश के सर्वश्रेष्ठ वित्तीय प्रबंधन वाले राज्यों में स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों के राष्ट्रीय सूचकांक में भी उत्तराखंड शीर्ष स्थान पर है।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित उपभोक्ताओं और व्यापारियों से अपील की कि प्रत्येक खरीद पर बिल अवश्य लें, जिससे लेनदेन की प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और राज्य का राजस्व तंत्र मजबूत हो। उन्होंने कहा कि जनता और सरकार के बीच विश्वास जितना मजबूत होता है, विकास की गति उतनी अधिक बढ़ जाती है।
योजना के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने बताया कि योजना में ९०,००० उपभोक्ताओं ने प्रतिभाग किया और कुल ६.५ लाख बिल जमा किए गए, जिनका मूल्य २७० करोड़ रुपये रहा। उन्होंने कहा कि यह संख्या दर्शाती है कि जनता अब दस्तावेज आधारित लेनदेन की आवश्यकता को समझने लगी है।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि आयुक्त कर सोनिका ने बताया कि कुल १८८८ विजेताओं को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, योजना की अवधि के दौरान १७ महीनों तक प्रति माह १५०० पुरस्कार भी प्रदान किए गए। अधिकारियों ने कहा कि इस योजना ने कर अनुपालन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उपभोक्ताओं को पारदर्शी लेनदेन के लिए प्रेरित किया है।
पुरस्कारों में विविधता भी योजना की खासियत रही। उपभोक्ताओं को मिली वस्तुओं में ०२ ईवी कार, १६ मारुति आल्टो के–१० कार, २० ईवी स्कूटर, ५० बाइक, १०० लैपटॉप, २०० स्मार्ट टीवी, ५०० टैबलेट, और १००० माइक्रोवेव शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, इन पुरस्कारों ने जनता में उत्साह बढ़ाया और योजना को अधिक प्रभावी बनाया।
कार्यक्रम में विधायक सरिता कपूर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आयुक्त कर सोनिका, अपर आयुक्त अनिल सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह योजना राज्य में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






