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मुख्यमंत्री धामी ने राज्य में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए कदमों की घोषणा की

हरिद्वार: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को घोषणा की कि सरकार राज्य में संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार और विस्तार के लिए एक उच्च स्तरीय आयोग का गठन करेगी। सोमवार को कार्यक्रम के दूसरे दिन इसका विस्तार किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति ने सम्मेलन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया, जहाँ उन्होंने संस्कृत उत्थान के लिए उच्च स्तरीय आयोग के गठन की घोषणा की।

हमारे संवाददाता बताते हैं कि सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने संस्कृत को राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा बताते हुए कहा कि यह भाषा भारत की प्राचीनतम बौद्धिक परंपरा की वाहक है और आज भी वैज्ञानिक, आध्यात्मिक तथा दार्शनिक क्षेत्रों में समान रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन ग्रंथों की भाषा नहीं बल्कि भारतीय चिंतन की आधारशिला है और इसे आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्जीवित करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यालय में नवम कक्षा तक संस्कृत के विद्यार्थी रहे और उस दौरान सीखे गए श्लोक तथा व्याकरण आज भी उन्हें याद हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत के माध्यम से भारतीय समाज ने वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, गणित, ज्योतिष, साहित्य और अध्यात्म का अद्वितीय ज्ञान विश्व को प्रदान किया। उन्होंने कहा कि तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने इस ज्ञान को दुनिया तक पहुँचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और इसी विरासत को आगे बढ़ाना हमारी साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। ई संस्कृत शिक्षण पोर्टल, मोबाइल एप और डिजिटल साहित्य जैसी पहलों से संस्कृत सीखने की प्रक्रिया आसान और सुलभ हुई है। उन्होंने कर्नाटक के मट्टूर गाँव का उदाहरण देते हुए कहा कि रोजमर्रा की भाषा के रूप में संस्कृत आज भी प्रासंगिक हो सकती है और इसे सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में लोकसभा कार्यवाही के संस्कृत अनुवाद की पहल की है जो भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत वैश्विक स्तर पर अपनी उपयोगिता साबित कर रही है और यूरोप सहित अनेक देशों में इस भाषा पर शोध लगातार बढ़ रहा है।

संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत संस्कृत विद्यालयों की छात्राओं को प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जा रही है। डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को सहायता प्रदान की जा रही है। संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना के माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को तीन श्रेणियों में पुरस्कृत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, वेद सम्मेलन, ज्योतिष सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाएँ और भाषाई प्रतियोगिताएँ नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य के प्रत्येक जिले में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित किए जाएंगे जिनका उद्देश्य संस्कृत को जन जन तक पहुँचाना है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में संस्कृत केवल अनुष्ठान की भाषा नहीं रहेगी बल्कि वार्तालाप और अध्ययन की भाषा के रूप में भी विकसित होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पवित्र भूमि हमेशा से वेदों और ऋषियों की तपस्थली रही है इसलिए संस्कृत का संवर्धन इस राज्य के लिए सांस्कृतिक दायित्व भी है और आध्यात्मिक कर्तव्य भी।

सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, विधायक आदेश चौहान, विधायक प्रदीप बत्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद, विदेश सचिव मीना मल्होत्रा, संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपति, देश विदेश के विद्वान और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

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