नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को हरिद्वार सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा तीर्थयात्रियों के लिए रेल सेवाओं से संबंधित पूछे गए अवितारित प्रश्न का उत्तर देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हरिद्वार को वर्तमान में ८८ ट्रेन सेवाएँ मिल रही हैं, जबकि देहरादून स्टेशन पर ३६ ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे का नेटवर्क राज्यों की सीमाओं के पार विस्तृत है और नई सेवाएँ नेटवर्क आवश्यकताओं के आधार पर शुरू की जाती हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून और हरिद्वार वाराणसी, गया, पुरी, पटना और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों से कई ट्रेन युग्मों के माध्यम से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन कनेक्शनों में वाराणसी के लिए ३ युग्म, गया के लिए १ युग्म, पुरी के लिए १ युग्म, पटना के लिए २ युग्म और कोलकाता के लिए ३ युग्म शामिल हैं।
हमारे संवाददाता के अनुसार, मंत्री द्वारा प्रस्तुत विवरण में हरिद्वार और देहरादून दोनों स्टेशनों पर चल रही ट्रेनों की विस्तृत सूची शामिल थी। उन्होंने कहा कि हरिद्वार को जनशताब्दी, विभिन्न एक्सप्रेस और वंदे भारत जैसी सेवाएँ मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून स्टेशन शताब्दी, जनशताब्दी, नंदा देवी, कुम्भ, उपासना और अन्य एक्सप्रेस सेवाओं से जुड़ा है।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय रेलवे त्योहारों, अवकाशों और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अतिरिक्त यात्रियों की भीड़ को देखते हुए विशेष ट्रेनें भी संचालित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी सेवाएँ तभी चलाई जाती हैं जब परिचालन क्षमता, यात्री मांग और अन्य तकनीकी पहलुओं की अनुमति हो।
हमारे संवाददाता ने बताया कि सदन के समक्ष प्रस्तुत सूची में हरिद्वार को मिलने वाली सभी प्रमुख ट्रेनों का विवरण दिया गया। इनमें आनंद विहार, लखनऊ, नई दिल्ली, अमृतसर, हावड़ा, वलसाड, प्रयागराज संगम, लक्ष्मीबाई नगर, जम्मू तवी, कटरा, फिरोजपुर, बीकानेर, बाड़मेर, मुजफ्फरपुर, गोरखपुर, टनकपुर, बनारस, पुरी, बांद्रा, साबरमती, भावनगर, ओखा, उदयपुर सिटी और तिरुवनंतपुरम नॉर्थ से आने वाली सेवाएँ शामिल थीं। इसके अतिरिक्त ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों के लिए यात्री एवं मेमू सेवाएँ भी उपलब्ध थीं।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि देहरादून स्टेशन की सूची में आनंद विहार और लखनऊ से वंदे भारत, नई दिल्ली से शताब्दी, नई दिल्ली और काठगोदाम के लिए जनशताब्दी, तथा हावड़ा, कोटा, सुबेदारगंज, काठगोदाम, मुजफ्फरपुर, गोरखपुर, टनकपुर, बनारस, ओखा और सहारनपुर से आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें शामिल थीं।
अधिकारियों ने कहा कि ये सेवाएँ उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों और यात्रियों के लिए प्रमुख रेल संपर्क प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि संसद में साझा किए गए विवरण से वर्तमान नेटवर्क की क्षमता और पहुँच का स्पष्ट संकेत मिलता है।
हमारे संवाददाता के अनुसार, मंत्री ने कहा कि त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान अतिरिक्त सेवाओं की आवश्यकता होती है और रेलवे इन्हें परिचालन परिस्थितियों के अनुसार चलाता है। उन्होंने कहा कि नई ट्रेनों की शुरुआत ट्रैक की उपलब्धता, रोलिंग स्टॉक, रखरखाव क्षमता और परिचालन मार्गों की स्थिति की समीक्षा के बाद ही संभव है।
मंत्री ने कहा कि रेलवे माँग के आधार पर सभी सेक्टरों की निगरानी करता है और भविष्य में आवश्यकतानुसार नई सेवाएँ शुरू की जाएँगी।






