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राष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स मिशन की मांग तेज, नीति रोडमैप ने कहा कि गतिशीलता विषमता दूर करना राष्ट्रीय प्राथमिकता

नई दिल्ली: एक नई नीति पत्र ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स मिशन की स्थापना की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। यह नीति पत्र, जिसका शीर्षक “फिक्सिंग द मोबिलिटी डिवाइड: ए पॉलिसी रोडमैप फॉर एक्सेसिबल प्रोस्थेटिक केयर इन इंडिया” है, कहता है कि प्रोस्थेटिक देखभाल को परोपकार या सीमांत स्वास्थ्य हस्तक्षेप के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय उत्पादकता के मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जाना चाहिए।

यह दस्तावेज पराशर इंडस्ट्रीज और कैलाश खेर फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है और राजधानी में नीति निर्माताओं, सरकारी संस्थानों और संबंधित हितधारकों की उपस्थिति में जारी किया गया। रिपोर्ट में भारत की प्रोस्थेटिक देखभाल प्रणाली की मौजूदा खामियों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है और एक ऐसे ढांचे की रूपरेखा दी गई है जो सुलभ, किफायती और एकीकृत सेवाओं को सुनिश्चित कर सके।

नीति पत्र के अनुसार भारत में प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में अंग-विच्छेदन के मामले सामने आते हैं, जिनका कारण सड़क हादसे, मधुमेह, औद्योगिक दुर्घटनाएं और रक्षा संबंधी घटनाएं हैं। इसके बावजूद प्रोस्थेटिक सेवाएं देश में अब भी असमान रूप से उपलब्ध हैं और मुख्यत: शहरी क्षेत्रों तक सीमित हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि उन्नत प्रोस्थेटिक उपकरणों की कीमत कई लाख रुपये तक पहुंच जाती है, जिससे अधिकांश जरूरतमंद लोग इन्हें वहन नहीं कर पाते। साथ ही राज्य दर राज्य बीमा कवरेज की असमानता और पुनर्वास तंत्र की कमी के कारण मरीज लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करते हैं।

रोडमैप में कहा गया है कि एकीकृत राष्ट्रीय ढांचे के अभाव में सैनिकों, मजदूरों और नागरिकों सहित अम्प्यूटी अक्सर बिखरी हुई और पुरानी सेवाओं पर निर्भर रहने को मजबूर होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रोस्थेटिक्स को मानव पूंजी के राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे का हिस्सा माना जाना चाहिए, जो आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत २०४७ की दृष्टि से भी मेल खाता है।

नीति पत्र की प्रमुख सिफारिशों में राष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स मिशन की स्थापना शामिल है, जो स्वास्थ्य सेवा वितरण, रक्षा पुनर्वास, सामाजिक न्याय योजनाओं और कौशल विकास पहलों को समन्वित करेगा। रिपोर्ट ने प्रोस्थेटिक देखभाल को आयुष्मान भारत में पूर्णत: शामिल करने का सुझाव दिया, जिसमें फिटिंग, फॉलो-अप और मेंटेनेंस सेवाएं शामिल हों। अध्ययन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि इससे आय और भौगोलिक स्थिति के आधार पर गतिशीलता तक पहुंच में मौजूद असमानता समाप्त होगी।

रोडमैप ने प्रोस्थेटिक उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को मजबूत करने की वकालत की और कहा कि मेक इन इंडिया, एमएसएमई और नवाचार क्लस्टरों के माध्यम से आयात पर निर्भरता कम करके उच्च गुणवत्ता और किफायती उपकरणों का राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सकता है। इसमें जिला स्तर पर प्रोस्थेटिक और पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की भी सिफारिश की गई।

नागेंद्र पाराशर, निदेशक, पाराशर इंडस्ट्रीज (Nagender Parashar, Director, Parashar Industries)
नागेंद्र पाराशर, निदेशक, पाराशर इंडस्ट्रीज

पराशर इंडस्ट्रीज के निदेशक नागेंद्र पराशर ने कहा, “प्रोस्थेटिक्स कोई वैकल्पिक चिकित्सा उपकरण नहीं हैं। यह गरिमा और उत्पादकता के उपकरण हैं। जब कोई अम्प्यूटी गतिशीलता प्राप्त करता है, वह अर्थव्यवस्था और समाज में योगदान देने की अपनी क्षमता भी वापस पाता है। राष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स मिशन कल्याण नहीं, यह राष्ट्र निर्माण है।”

कैलाश खेर फाउंडेशन के मुख्य रणनीति अधिकारी पायलट नीरज सेहरावत ने कहा, “हमारे जमीनी अनुभव बताते हैं कि प्रोस्थेटिक्स तक पहुंच की कमी परिवारों को निर्भरता के चक्र में फंसा देती है। आयुष्मान भारत के तहत प्रोस्थेटिक देखभाल को शामिल करने से कोई भी नागरिक आय या भूगोल के कारण गतिशीलता से वंचित नहीं रहेगा।”

पूर्व लोकसभा सांसद डॉ. किरीट पी. सोलंकी ने कहा, “यह रोडमैप स्वास्थ्य सेवा, स्वदेशी नवाचार और सामाजिक न्याय को जोड़कर प्रोस्थेटिक्स को सार्वजनिक नीति के केंद्र में रखता है। प्रोस्थेटिक देखभाल तक सार्वभौमिक पहुंच एक समावेशी और प्रगतिशील भारत के लिए आवश्यक है।”

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक प्रो. एन. के. गांगुली ने समग्र पुनर्वास पर जोर देते हुए कहा कि प्रोस्थेटिक देखभाल केवल उपकरण प्रदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें प्रशिक्षित पेशेवर, मानक आधारित प्रक्रियाएं और परिणाम आधारित मूल्यांकन शामिल होना चाहिए।

पीएएसजी एडवाइजरी के सह-संस्थापक नितीश शर्मा ने कहा, “प्रोस्थेटिक्स को आयुष्मान भारत से जोड़ना और स्वदेशी विनिर्माण के साथ संरेखित करना भारत को किफायती और उन्नत प्रोस्थेटिक समाधानों का वैश्विक केंद्र बना सकता है।”

दस्तावेज में कहा गया कि प्रोस्थेटिक क्षेत्र में निवेश से दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त होते हैं, जिनमें आजीविका की बहाली, कल्याण पर निर्भरता में कमी और रक्षा पुनर्वास को मजबूती शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार एक मजबूत प्रोस्थेटिक पारिस्थितिकी तंत्र भारत को समावेशी विकास और उन्नत विनिर्माण का वैश्विक अग्रणी बना सकता है।

रोडमैप ने अंत में सरकार से आग्रह किया कि वह निर्णायक कदम उठाकर प्रोस्थेटिक देखभाल को राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में मान्यता दे। इसमें कहा गया कि गतिशीलता तक पहुंच को गरिमा और आर्थिक सहभागिता के मूल आधार के रूप में देखा जाना चाहिए, जो एक विकसित और न्यायसंगत भारत के निर्माण के लिए आवश्यक है।

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