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सतर्कता विभाग ने हरिद्वार के खंड शिक्षा अधिकारी को रिश्वत लेते पकड़ा

हरिद्वार: सतर्कता विभाग ने हरिद्वार जिले के बहादराबाद क्षेत्र में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी को ₹२०,००० की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गुरुवार को देहरादून सतर्कता टीम द्वारा की गई, जिसके बाद आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर आगे की वैधानिक कार्यवाही शुरू की गई।

हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार अधिकारी की पहचान बहादराबाद के खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत बृजपाल सिंह राठौड़ के रूप में हुई है। आरोप है कि वह एक निजी स्कूल के नवीनीकरण और मान्यता से संबंधित कार्यों के एवज में अवैध धनराशि की मांग कर रहा था। शिकायत प्राप्त होने के बाद सतर्कता विभाग ने योजना बनाकर जाल बिछाया और रिश्वत लेते समय अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया।

यह गिरफ्तारी रोशनाबाद स्थित विकास भवन परिसर में की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी को देहरादून ले जाया गया, जहां आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सतर्कता अधिकारियों ने पुष्टि की कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और ट्रैप के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों को अभियोजन के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार सतर्कता टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाए। बीते वर्षों में सतर्कता ट्रैप मामलों और गिरफ्तारियों की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, जो प्रवर्तन की गंभीरता को दर्शाती है।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सतर्कता विभाग को भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री ने विजिलेंस एजेंसियों को बिना किसी दबाव के, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करने की खुली छूट प्रदान की है।

इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले कह चुके हैं, “देवभूमि उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना और सुशासन की कार्य संस्कृति विकसित करना हमारा प्रयास है। सतर्कता विभाग को भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। ईमानदार शासन व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है और ट्रैप मामलों में तेजी से कार्रवाई संभव हुई है। मजबूत साक्ष्यों के आधार पर सतर्कता विभाग कई मामलों में न्यायालय से दोषियों को सजा दिलाने में भी सफल रहा है।

भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा टोल फ्री नंबर १०६४ जारी किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस हेल्पलाइन के जरिए प्राप्त शिकायतों पर समयबद्ध जांच और कार्रवाई की जाती है।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिए हैं कि सतर्कता ट्रैप मामलों में आरोपी अधिकारियों को अंतिम निर्णय आने तक किसी भी महत्वपूर्ण पद या जिम्मेदारी पर नियुक्त न किया जाए। साथ ही, अभियोजन की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके।

हमारे संवाददाता के अनुसार, खंड शिक्षा अधिकारी की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट संदेश गया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक अधिकारी ने कहा, “लोक सेवकों से ईमानदारी की अपेक्षा की जाती है। इससे किसी भी प्रकार का विचलन सख्त कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित करेगा।”

शिक्षा विभाग को गिरफ्तारी की सूचना दे दी गई है और सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्यवाही की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आपराधिक मुकदमे के साथ-साथ प्रशासनिक कार्रवाई भी अलग से की जाएगी।

सतर्कता की इस कार्रवाई का नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है, जो लंबे समय से सार्वजनिक कार्यालयों में रिश्वतखोरी को लेकर चिंता जताते रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि जन-जागरूकता और नागरिक सहयोग के कारण ही ट्रैप मामलों में सफलता मिल रही है।

राज्य सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही उसकी प्राथमिकता है। अधिकारियों ने बताया कि सतर्कता निगरानी आगे भी सभी विभागों में जारी रहेगी, विशेष रूप से उन कार्यालयों में जहां आम जनता का सीधा संपर्क होता है, ताकि नागरिकों का शोषण रोका जा सके।

सतर्कता विभाग ने जनता से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी निःसंकोच साझा करें और आश्वासन दिया कि शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार सतत प्रवर्तन और जनभागीदारी से ही भ्रष्टाचार का उन्मूलन संभव है और सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास मजबूत किया जा सकता है।

खंड शिक्षा अधिकारी की गिरफ्तारी के साथ राज्य सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वच्छ प्रशासन और भ्रष्टाचार मुक्त शासन सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम उठाए जाते रहेंगे।

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