पंचायत उपचुनाव
उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को राज्यभर में विभिन्न ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों की रिक्त सीटों पर उपचुनाव की तिथियों की घोषणा की। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार द्वारा जारी अधिसूचना में चुनाव प्रक्रिया की पूरी समय-सारिणी निर्धारित की गई है।
अधिसूचना के अनुसार, ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के रिक्त पदों को भरने के लिए यह उपचुनाव कराया जाएगा। हालांकि हरिद्वार जिले में यह उपचुनाव नहीं होगा क्योंकि वहां संबंधित पद पहले ही भरे जा चुके हैं।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया १३ और १४ नवम्बर को प्रातः १० बजे से दोपहर ३ बजे तक चलेगी। नामांकन पत्रों की जांच १५ नवम्बर को होगी, जबकि नाम वापसी की अंतिम तिथि १६ नवम्बर दोपहर ३ बजे तक निर्धारित की गई है। मतदान २० नवम्बर को सुबह ८ बजे से शाम ५ बजे तक होगा और मतगणना २२ नवम्बर को सुबह ८ बजे से शुरू होगी।
अधिसूचना में कहा गया है कि नामांकन, जांच और नाम वापसी सहित सभी प्रक्रियाएं संबंधित जिलाधिकारियों एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों की देखरेख में होंगी। मतदान प्रक्रिया निर्धारित पंचायत कार्यालयों और मतदान केंद्रों पर कराई जाएगी, जहां स्थानीय निर्वाचन अधिकारी निगरानी रखेंगे।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि जिला पंचायत के उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र जिला पंचायत मुख्यालय में दाखिल और जांचे जाएंगे, जबकि क्षेत्र पंचायत के उपचुनाव के लिए यह प्रक्रिया विकासखंड मुख्यालय में होगी। सभी उपचुनावों के अंतिम परिणाम मतगणना पूर्ण होने के बाद संबंधित जिला मुख्यालय पर घोषित किए जाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह उपचुनाव उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, २०१६ (संशोधित) तथा पंचायती राज (सदस्यों, प्रधान और उपप्रधानों का निर्वाचन) नियमावली, १९९४ के प्रावधानों के तहत कराया जाएगा।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि आयोग ने सभी जिलाधिकारियों और निर्वाचन अधिकारियों को आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करने तथा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि नामांकन की तिथियों से पहले मतदाता सूची एवं संबंधित चुनाव सामग्री निर्धारित कार्यालयों में उपलब्ध करा दी जाए।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि इन उपचुनावों के माध्यम से राज्य की विभिन्न पंचायतों में लंबे समय से रिक्त पद भरे जा सकेंगे, जिससे स्थानीय स्वशासन प्रणाली को और सशक्त बनाया जा सकेगा। यह निर्णय जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।






