होमचंपावतगोवा नाइटक्लब अग्निकांड में उत्तराखंड के पाँच युवकों की मौत

गोवा नाइटक्लब अग्निकांड में उत्तराखंड के पाँच युवकों की मौत

देहरादून: गोवा के प्रसिद्ध नाइटक्लब में रविवार देर रात हुई भीषण आग की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में उत्तराखंड के पाँच युवकों की मौत की पुष्टि हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और शुरुआती जांच से यह सामने आया है कि अधिकांश लोगों की मौत आग की लपटों से नहीं, बल्कि भूमिगत हिस्से में अचानक ऑक्सीजन खत्म होने से हुई। पुलिस के अनुसार २५ शवों में से २३ पर जलने के निशान नहीं मिले, जबकि केवल २ शव गंभीर रूप से झुलसे थे।

घटना के मामले में चार आरोपियों को रविवार को गिरफ्तार किया गया था, जबकि संचालन प्रबंधक को सोमवार को दिल्ली से पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा मानकों में गंभीर लापरवाही की गई, जिसके कारण भूमिगत किचन एरिया में मौजूद लोग बाहर निकल भी नहीं पाए।

उत्तराखंड के जिन युवकों की जान गई

दुर्घटना में जान गंवाने वालों में अधिकांश कर्मचारी थे जो क्लब में काम कर रहे थे। इनमें शामिल हैं:

  • जीतेन्द्र, उम्र २१ वर्ष, पिता संता सिंह, गाँव सांकुल्ड (टिहरी गढ़वाल)
  • सतीश राणा, उम्र २६ वर्ष, पिता सुरेंद्र सिंह राणा, गाँव चंगा डोलिया (टिहरी गढ़वाल)
  • मनीष, उम्र २३ वर्ष, पिता कृष्ण सिंह महार, क्षेत्र नेत्र सालन (चंपावत)
  • सुरेंद्र, उम्र ३८ वर्ष, पिता अमर सिंह, गाँव सिमाली जामराड़ी बैरा (पिथौरागढ़)
  • सुमित नेगी, मूलतः गढ़वाल क्षेत्र

इसके अतिरिक्त, पर्यटकों में भी उत्तराखंड की कई महिलाएँ शामिल थीं, जिनकी पहचान बाद में परिजनों द्वारा की गई।

ग्रामीणों में आक्रोश, परिवारों पर टूटा दुःख का पहाड़

टिहरी गढ़वाल के २४ वर्षीय सतीश राणा की मौत ने पूरे इलाके को शोक में डूबा दिया है। वह परिवार का इकलौता सहारा था। खेती पर आश्रित माता-पिता बेटे की कमाई पर निर्भर थे। दो बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि छोटा भाई पढ़ाई कर रहा है। परिवार ने बताया कि रविवार रात आई जानकारी ने सबको असहाय कर दिया और सोमवार शाम तक उनका पार्थिव शरीर गाँव लाए जाने की उम्मीद है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सतीश बेहद जिम्मेदार और परिवार के प्रति समर्पित था। उसकी मौत ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप

घटना की जानकारी मिलते ही टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने पीड़ित परिवार से संपर्क किया और सरकारी स्तर पर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार परिवार से संपर्क बनाए हुए है और आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी की जा रही हैं।

क्या कहती है जांच

पुलिस के अनुसार:

  • भूमिगत क्षेत्र में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था।
  • आग लगते ही धुआँ तेजी से फैल गया और लोग बाहर निकल नहीं पाए।
  • आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई प्रभावी प्रोटोकॉल मौजूद नहीं था।
  • क्लब में संचालित कुछ गतिविधियाँ लाइसेंस नियमों के बाहर पाई गईं।

स्थानीय संगठनों और पर्यटकों ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों का कठोरता से पालन कराया जाए।

परिजनों की मांग

पीड़ित परिवारों ने सरकार से आर्थिक सहायता और कानूनी कार्रवाई की माँग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस लापरवाही से यह हादसा हुआ, उसके लिए दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रदेश में मातम का माहौल

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों से बाहर काम करने वाले युवाओं की संख्या काफी अधिक है। इसलिए ऐसी दुर्घटनाएँ पूरे प्रदेश को छू जाती हैं। पाँच नौजवानों की मौत के बाद कई गाँवों में शोक का माहौल है और स्थानीय लोगों तथा रिश्तेदारों का तांता पीड़ित परिवारों के घर लगा हुआ है।

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