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पीआरएसआई सम्मेलन में महिला सशक्तीकरण और जनसंचार पर जोर

देहरादून: पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के 47वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन महिला सशक्तीकरण, राष्ट्रीय विकास में जनसंचार की निर्णायक भूमिका और सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान को लेकर अहम संदेश सामने आए। तीन दिवसीय यह राष्ट्रीय पीआरएसआई सम्मेलन आज संपन्न होगा, जिसमें देशभर से जनसंपर्क विशेषज्ञ, नीति निर्माता, वरिष्ठ अधिकारी और मीडिया प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित सत्रों और संबोधनों में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में जनसंचार की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। वक्ताओं ने कहा कि सशक्त, पारदर्शी और उत्तरदायी संवाद के बिना समावेशी विकास संभव नहीं है।

मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन को संबोधित करते हुए उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तीकरण तभी संभव है जब वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों। उन्होंने कहा कि रोजगार, उद्यमिता और निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी के बिना समावेशी विकास की कल्पना अधूरी है।

उन्होंने कहा, “महिला सशक्तीकरण केवल नारों तक सीमित नहीं रह सकता। महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता उनके सामाजिक और राजनीतिक सशक्तीकरण की आधारशिला है।” उन्होंने यह भी कहा कि जनसंपर्क और जनसंचार आज सरकार और जनता के बीच संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम बन चुके हैं।

हमारे संवाददाता के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष ने जनसंपर्क और संचार के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र महिलाओं के लिए व्यापक संभावनाएं प्रदान करता है, बशर्ते सूचना की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सूचना को तेजी से पहुंचाने के साथ-साथ उसकी प्रामाणिकता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।

पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जनसंचार और कम्युनिकेशन देश के विकास की रीढ़ बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावी जनसंचार लोकतंत्र को मजबूत करता है और सरकार तथा जनता के बीच विश्वास की नींव रखता है।

उन्होंने कहा, “आज के समय में जनसंचार कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। बिना प्रभावी संवाद के मजबूत लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती।” उन्होंने पीआरएसआई जैसी संस्थाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये संगठन संवाद की कड़ी को सुदृढ़ करते हैं।

हमारे संवाददाता आगे बताते हैं कि डॉ. निशंक ने जनसंपर्क उद्योग से जुड़े पेशेवरों को तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के उपयोग के साथ-साथ विश्वसनीयता और नैतिक मूल्यों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भ्रामक सूचनाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

पद्मश्री सम्मानित डॉ. बी.के. संजय ने उत्तराखंड की 25 वर्षों की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मूलभूत सुविधाओं में निरंतर सुधार राज्य के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को मजबूती प्रदान कर रहा है।

सम्मेलन के दौरान सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान को भी सम्मानित किया गया। उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार को राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में उनके योगदान के लिए पीआरएसआई राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

सम्मान स्वीकार करते हुए डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि यह सम्मान पूरी स्वास्थ्य विभाग की टीम को समर्पित है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार और एयर एम्बुलेंस सेवा को राज्य की प्रमुख उपलब्धियों में बताया।

हमारे संवाददाता के अनुसार, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अंतिम छोर तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य है।

पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पाठक ने अतिथियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन जनसंचार पेशेवरों को आत्ममंथन और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि नैतिकता, नवाचार और जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता आज जनसंपर्क की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने गलत सूचना, डिजिटल मीडिया के प्रभाव और संकट के समय जनसंचार की बढ़ती जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क केवल छवि निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनहित, जवाबदेही और सामाजिक दायित्व को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सम्मेलन के आज समापन से पहले आयोजकों ने कहा कि बीते दो दिनों की चर्चाएं और सुझाव भारत में जनसंचार के भविष्य को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे। प्रतिभागियों ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन के निष्कर्ष लोकतांत्रिक शासन और समावेशी विकास को मजबूत करने में योगदान देंगे।

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