उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आज हल्द्वानी में राज्य स्तरीय सैनिक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में प्रदेशभर के पूर्व सैनिक, वीर नारियां, सेना अधिकारी और उनके परिजन शामिल हो रहे हैं।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि यह कार्यक्रम एम.बी. इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित किया जा रहा है, जिसे विशेष रूप से सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान में सजाया गया है। सम्मेलन का उद्देश्य प्रदेश के सैनिकों के योगदान को सम्मानित करना और उनके कल्याण से संबंधित योजनाओं पर सीधा संवाद स्थापित करना है।
राज्य सैनिक कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस भव्य आयोजन में प्रदेशभर से एक हजार से अधिक पूर्व सैनिक और वीर नारियां भाग ले रही हैं। कार्यक्रम में सैनिक कल्याण, रोजगार, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग परामर्श केंद्र बनाए गए हैं।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने सुबह कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन देवभूमि के उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की सेवा और सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को वीरभूमि कहा जाता है क्योंकि यहां के जवान देश की सीमाओं पर अदम्य साहस और समर्पण के साथ सेवा करते हैं।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि इस कार्यक्रम में नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और उधम सिंह नगर जिलों से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक शामिल हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा प्रतिभागियों के लिए परिवहन, चिकित्सा सहायता, पेयजल और भोजन की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। वृद्ध पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के लिए बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आगमन रहेगा। मुख्यमंत्री लगभग सुबह 10:55 बजे हल्द्वानी पहुंचेंगे और मुख्य सत्र का उद्घाटन करेंगे। वे पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीद परिवारों को सम्मानित करेंगे। मुख्यमंत्री धामी के संबोधन के दौरान सैनिक कल्याण विभाग की नई योजनाओं की घोषणा होने की संभावना है, जिनमें रोजगार सहायता, आवास योजनाएं और शहीद परिवारों के लिए वित्तीय सहयोग शामिल हैं।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि यह सम्मेलन उत्तराखंड की गौरवशाली सैन्य परंपरा को सम्मान देने का प्रतीक है। राज्य स्थापना के 25 वर्षों के इस अवसर पर सरकार का उद्देश्य प्रदेश के सैनिक समुदाय को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। सम्मेलन के दौरान “राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की भूमिका”, “वीर नारियों का योगदान” और “सेना सेवा उपरांत पुनर्वास” जैसे विषयों पर पैनल चर्चा आयोजित की जा रही है।
कार्यक्रम में कई वीर नारियों और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर आगामी महीनों में एक समग्र सैनिक कल्याण नीति तैयार की जाएगी।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को सैनिक कल्याण के क्षेत्र में आदर्श राज्य बनाना है। इस दिशा में शिक्षा सहायता, स्वास्थ्य बीमा, रोजगार संवर्धन और पूर्व सैनिकों के लिए स्वरोजगार योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस ने वैकल्पिक मार्ग तय किए हैं। स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों की टीम प्रतिभागियों की सहायता में तैनात है।
दोपहर के सत्र में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सैनिकों की वीरता और पराक्रम को प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को सम्मानित किया जाएगा और देवभूमि के शौर्य को नमन किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि हल्द्वानी में हो रहा यह सैनिक सम्मेलन रजत जयंती वर्ष के अंतर्गत शुरू की गई कई योजनाओं की पहली कड़ी है। आने वाले महीनों में प्रदेशभर में सैनिकों के कल्याण से जुड़ी कई नई पहलें शुरू की जाएंगी, जिनमें स्वास्थ्य शिविर, पेंशन जागरूकता अभियान और वीर नारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा, देशभक्ति और सेवा भावना का उत्सव है। यह देवभूमि की उस पहचान का स्मरण कराता है जिसने भारत के हर मोर्चे पर अपनी वीरता का परचम लहराया है।






