एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल के जिलाधिकारी को रामनगर नगर निगम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर निर्णय लेने और बंद पड़े स्लॉटरहाउस को दोबारा खोलने की अनुमति देने का निर्देश दिया है। यह निर्देश अदालत ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया।
न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैथानी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने रामनगर निवासी अناس कुरैशी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने डीएम के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत रामनगर के स्लॉटरहाउस को बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि अबेटॉयर ने सभी निर्धारित मानकों का पालन किया है और संचालन के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त हैं।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि याचिकाकर्ता ने अदालत को अवगत कराया कि जिलाधिकारी के आदेश के तहत स्लॉटरहाउस बंद किया गया, जबकि यह सभी शर्तों का अनुपालन कर रहा था। याचिका में कहा गया कि निविदा शर्तों के अनुसार यह स्लॉटरहाउस मार्च २०२६ तक संचालित हो सकता है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि स्लॉटरहाउस बंद होने के बाद से रामनगर में मांस व्यापारियों और उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय बाजारों में अब यूपी और अन्य राज्यों से मांस लाया जा रहा है, जिससे न केवल स्थानीय व्यापार प्रभावित हुआ है बल्कि कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि याचिकाकर्ता के अनुसार, मांस के दाम दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं और व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। याचिका में अनुरोध किया गया कि बंद पड़े स्लॉटरहाउस को पुनः चालू करने की अनुमति दी जाए ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
रामनगर नगर निगम ने अपनी ओर से अदालत को बताया कि स्लॉटरहाउस वैधानिक रूप से संचालित था, लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित कुछ पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण रूप से पालन नहीं हो पाया था। निगम ने इस संबंध में अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी नैनीताल को निर्देश दिया कि वे नगर निगम की रिपोर्ट की समीक्षा करें और कानून के अनुसार स्लॉटरहाउस के पुनः संचालन पर निर्णय लें। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय सत्यापित अनुपालन पर आधारित होने चाहिए, न कि अनिश्चितकालीन बंदी पर।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि अदालत के इस निर्देश से स्थानीय मांस व्यापारियों को राहत मिलने की संभावना है, जो पिछले कई महीनों से स्लॉटरहाउस को दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे थे। जिलाधिकारी का निर्णय अब यह तय करेगा कि यह स्लॉटरहाउस पुनः संचालित होगा या नहीं।
यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि नगर निकायों के संचालन में पर्यावरणीय मानकों और आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि जिलाधिकारी का यह निर्णय भविष्य में राज्य के अन्य नगरों के लिए एक मिसाल बन सकता है।






