देहरादून: बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों का चल रहा आंदोलन मंगलवार को उस समय उग्र हो गया जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने लगे। प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार तक अपनी मांगें पहुँचाना था। नर्सिंग एकता मंच के नेतृत्व में अभ्यर्थी कई दिनों से लगातार धरना और विरोध कार्यक्रम चला रहे थे। उनका कहना था कि लम्बे समय से भर्ती प्रक्रिया लंबित है और सरकार की चुप्पी युवाओं में निराशा बढ़ा रही है।
प्रदर्शनकारी सुबह के समय राजपुर रोड से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि उनका मार्च शांतिपूर्ण था और वे केवल अपनी समस्याएँ मुख्यमंत्री को सौंपना चाहते थे। आगे बढ़ते हुए वे हाथीबड़कला क्षेत्र के पास पहुँचे जहाँ पुलिस बल पहले से तैनात था। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। दोनों पक्षों के बीच बहस हुई और स्थिति थोड़ी ही देर में गंभीर हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की हुई। कुछ लोग घायल भी हुए। स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र में कुछ समय तक अफरा तफरी का माहौल बना रहा। कई दुकानदारों ने सुरक्षा कारणों से अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। यातायात भी काफी देर तक बाधित रहा।
हमारे संवाददाता बताते हैं कि नर्सिंग एकता मंच ने सरकार से कई प्रमुख मांगें उठाई हैं। इनमें नियमित वार्षिक भर्तियों की घोषणा, लंबित आवेदन निपटान, आयु सीमा में छूट और सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब उनके पास सड़क पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। संवाददाता बताते हैं कि यह आंदोलन केवल रोजगार की प्रतीक्षा से जुड़ा मामला नहीं है बल्कि युवाओं के भविष्य की चिंता भी है।
झड़प के दौरान एक महिला अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि एक महिला पुलिसकर्मी ने उनके साथ गलत व्यवहार किया। इस आरोप ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया। मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो इससे पुलिस और नागरिकों के बीच भरोसा कमजोर होता है और ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
हमारे संवाददाता आगे बताते हैं कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर एकता विहार भेजा। पुलिस का कहना था कि यह कदम व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक था। हालांकि नर्सिंग एकता मंच ने पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताया। मंच नेताओं का कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बलपूर्वक खत्म करना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।
हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि इस घटना के बाद कई सामाजिक संगठनों और युवा समूहों ने भी अभ्यर्थियों के समर्थन में वक्तव्य जारी किए। उनका कहना था कि बेरोजगारी की समस्या गंभीर है और सरकार को संवेदनशीलता के साथ समाधान प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है और रिक्त पदों की तुरंत भरपाई होनी चाहिए।
दिन भर की हलचल के बाद भी सरकार की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि समाधान है और सरकार को उनके भविष्य पर स्पष्ट नीति प्रस्तुत करनी चाहिए।
नर्सिंग एकता मंच ने घोषणा की है कि वह जल्द ही पुनः बैठक करेगा और आगे की रणनीति तय करेगा। मंच नेताओं ने आशा व्यक्त की कि सरकार युवाओं की आवाज सुनेगी और भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र और पारदर्शी बनाएगी। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग करते रहेंगे और उम्मीद रखते हैं कि उनके मुद्दों का समाधान निकलेगा।






