होमउत्तराखंडआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में सतर्कता जरूरी: एएसपी अंकुश मिश्रा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में सतर्कता जरूरी: एएसपी अंकुश मिश्रा

देहरादून: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच उत्तराखंड पुलिस के अपर पुलिस अधीक्षक अंकुश मिश्रा ने लोगों से सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करने की सख्त अपील की। उन्होंने कहा कि एआई ने साइबर अपराध के तरीकों को अधिक तेज़, विश्वसनीय और खतरनाक बना दिया है, जिससे आम नागरिक आसानी से ठगी का शिकार हो सकते हैं। उनके यह विचार देहरादून में आयोजित पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अधिवेशन के तीसरे दिन चर्चा का प्रमुख केंद्र बने।

राष्ट्रीय अधिवेशन के तीसरे दिन आयोजित सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर अपराध, मिसइन्फॉर्मेशन और जनसंचार पर इसके प्रभाव को लेकर व्यापक मंथन हुआ। देशभर से आए जनसंपर्क विशेषज्ञों, अधिकारियों और शिक्षाविदों ने माना कि एआई जहां कार्यकुशलता बढ़ा रहा है, वहीं इसके दुरुपयोग से गंभीर खतरे भी सामने आ रहे हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए एएसपी अंकुश मिश्रा ने कहा,
“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसके प्रति जागरूक और सतर्क रहना बेहद आवश्यक है।”
उन्होंने कहा कि आज साइबर अपराध के लिए अपराधी को सामने आने की जरूरत नहीं होती। “आप घर बैठे भी साइबर फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं,” उन्होंने आगाह किया।

एएसपी मिश्रा ने बताया कि एआई के माध्यम से किसी व्यक्ति की आवाज की नकल की जा सकती है और डीपफेक वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिससे लोग भ्रमित होकर गलत निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना, निजी दस्तावेज साझा करना या व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करना गंभीर खतरे को आमंत्रण देता है।

“डीपफेक वीडियो या फर्जी सामग्री को आगे साझा करने वाला व्यक्ति भी कानूनन दोषी माना जाएगा,” उन्होंने स्पष्ट किया।
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखने और उन्हें डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की भी अपील की।

एआई के युग में बदल रहा है जनसंपर्क

अधिवेशन में यह भी चर्चा हुई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जनसंपर्क के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के सहायक महाप्रबंधक विनय जायसवाल ने कहा कि एआई ने डेटा विश्लेषण, मीडिया मॉनिटरिंग और ऑडियंस एनालिटिक्स को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया है।

उन्होंने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने संचार को तेज़ और प्रभावशाली बनाया है, लेकिन इसके साथ नैतिकता और सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।” उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीक का गलत उपयोग संस्थानों की साख को नुकसान पहुंचा सकता है।

एआई इंसान का विकल्प नहीं, सहायक है

ग्राफिक हिल यूनिवर्सिटी की सहायक प्रोफेसर ताहा सिद्दीकी ने कहा कि एआई इंसान की जगह नहीं ले सकता।
“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान का विकल्प नहीं है, बल्कि उसका सबसे अच्छा सहायक बन सकता है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने युवाओं से एआई को अवसर के रूप में देखने और अपने कौशल को समय के साथ अपडेट करने का आह्वान किया।

कॉरपोरेट कम्युनिकेशन में रणनीति जरूरी

पीआरएसआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यू.एस. शर्मा ने कहा कि कॉरपोरेट कम्युनिकेशन केवल सूचना साझा करने तक सीमित नहीं है।

“संचार किसी भी संगठन की विश्वसनीयता और पहचान की बुनियाद होता है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने पारदर्शिता, त्वरित प्रतिक्रिया और तथ्यात्मक संवाद को आज के दौर की आवश्यकता बताया।

जनसंचार और सामाजिक जिम्मेदारी

आरईसी के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन प्रबंधक इरफान रशीद ने कहा कि जनसंपर्क को प्रचार नहीं, बल्कि हितधारकों से संवाद का माध्यम समझा जाना चाहिए।

टीएचडीसी के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. अमरनाथ त्रिपाठी ने स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिहरी बांध परियोजना की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रभावी जनसंचार से जनविश्वास मजबूत होता है।

जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार पर जोर

पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पाठक ने कहा कि अधिवेशन से स्पष्ट संदेश निकला है कि एआई एक बड़ी चुनौती के साथ-साथ बड़ा अवसर भी है।

“साइबर सुरक्षा के प्रति सजग रहना और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है,” उन्होंने कहा।

अधिवेशन के समापन की ओर बढ़ते हुए वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सकारात्मक उपयोग तभी संभव है, जब जागरूकता, नैतिकता और सतर्कता को प्राथमिकता दी जाए। जनसंचार के क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों के लिए यह अधिवेशन मार्गदर्शक सिद्ध हुआ।

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