होमउत्तराखंडएग्रीस्टैक किसान रजिस्ट्री लागू करने के लिए प्रशिक्षण राज्य में शुरू

एग्रीस्टैक किसान रजिस्ट्री लागू करने के लिए प्रशिक्षण राज्य में शुरू

देहरादून: राज्य में किसानों को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने और उनकी पहचान को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री राज्य में लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में गढ़वाल मंडल के राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, ताकि राज्य के समस्त किसानों की डिजिटल किसान आईडी तैयार करने का कार्य समयबद्ध और प्रभावी ढंग से संपन्न किया जा सके।

हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सचिव, कृषि एवं राजस्व श्री एस. एन. पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित किया गया, जबकि कार्यक्रम में राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव श्रीमती रंजना राजगुरू की उपस्थिति रही। इस अवसर पर भारत सरकार के प्रतिनिधि श्री चिन्मय मेहता तथा श्री हर्षद पटेल, सलाहकार, भारत सरकार द्वारा एग्रीस्टैक प्रणाली के अंतर्गत तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री राज्य का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान करना है, जिससे उन्हें केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध रूप से मिल सके। यह पहल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देशभर में किसानों के लिए शुरू की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री एक केंद्रीकृत डिजिटल डाटाबेस होगी, जिसमें किसान पंजीकरण कराकर अपनी फार्मर आईडी या किसान आईडी प्राप्त कर सकेंगे। यह आईडी ग्यारह अंकों की होगी, जो ई-केवाईसी और फील्ड वेरीफिकेशन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जनरेट की जाएगी। यह डिजिटल पहचान भविष्य में किसानों के लिए एक स्थायी और विश्वसनीय पहचान के रूप में कार्य करेगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य में एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री राज्य के अंतर्गत प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अगस्त दो हजार पच्चीस में जनपद देहरादून की तहसील कालसी के राजस्व ग्राम क्यारी एवं लाटौ तथा तहसील त्यूनी के राजस्व ग्राम हनोल एवं कांडा में यह पायलट परियोजना भारत सरकार की टीम के सहयोग से प्रारंभ की गई थी। इस दौरान प्रायोगिक रूप से एक सौ अट्ठाईस काश्तकारों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार की गई।

हमारे संवाददाता जोड़ते हैं कि पायलट परियोजना की सफलता के बाद अब इसे पूरे राज्य में लागू करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस पायलट से प्राप्त अनुभव जमीनी स्तर पर आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान में सहायक सिद्ध होगा।

प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि फार्मर रजिस्ट्री का कार्य कृषि एवं राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से किया जाएगा। कृषि विभाग के कार्मिक रजिस्ट्रेशन अधिकारी के रूप में किसानों का पंजीकरण करेंगे, जबकि राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी वेरीफायर एवं एप्रूवर अधिकारी की भूमिका निभाएंगे, जिससे भूमि और किसान से संबंधित विवरण की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री राज्य के माध्यम से सरकार को किसानों की सटीक और अद्यतन जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे विभिन्न योजनाओं के नियोजन और क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। प्रथम चरण में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार की जाएगी, ताकि योजना की आगामी किस्तों के भुगतान में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

फार्मर रजिस्ट्री से किसानों को आपदा राहत, कृषि सब्सिडी, फसल ऋण, विभिन्न बीमा योजनाओं और अन्य किसान कल्याण कार्यक्रमों का लाभ समय पर प्रदान किया जा सकेगा। साथ ही यह प्रणाली कृषि योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन में भी उपयोगी सिद्ध होगी।

हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों से अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, मुख्य कृषि अधिकारी सहित लगभग दो सौ अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। अधिकारियों का कहना है कि इतने व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूरे राज्य में एकरूपता और दक्षता के साथ संपन्न हो।

राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि किसानों को डिजिटल प्रणाली से जोड़ते समय किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जागरूकता अभियान और फील्ड स्तर पर सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री राज्य में कृषि प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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