देहरादून: पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन, जीएसटी और वन नेशन वन टैक्स व्यवस्था के भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़े सकारात्मक प्रभावों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। अधिवेशन के तीसरे सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद देश में कर प्रणाली अधिक सरल, पारदर्शी और एकीकृत हुई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।
सत्र का विषय ‘पॉजिटिव इम्पैक्ट ऑन इकोनॉमिक प्रोस्पेक्टिव ऑफ इंडिया’ रहा, जिसमें बताया गया कि जीएसटी और एक राष्ट्र, एक कर की अवधारणा ने व्यापार, उद्योग, कृषि और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में संरचनात्मक सुधार लाए हैं। वक्ताओं ने कहा कि इन सुधारों से न केवल व्यापार करना आसान हुआ है, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों को भी सीधा लाभ मिला है।
भारतीय राजस्व सेवा की वरिष्ठ अधिकारी और कस्टम कमिश्नर बी. सुमिदा देवी ने कहा कि जीएसटी दरों में कमी से उद्योगों पर कर भार घटा है और अनुपालन प्रक्रिया आसान हुई है। उन्होंने कहा, “जीएसटी ने इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा देकर उत्पादन लागत को कम किया है, जिससे उद्योगों की लाभप्रदता बढ़ी है और निवेश को प्रोत्साहन मिला है।”
उन्होंने कहा कि एक देश, एक कर व्यवस्था ने कई अप्रत्यक्ष करों को समाप्त कर एक समान राष्ट्रीय बाजार का निर्माण किया है। “इससे न केवल कर संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता आई है, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत में भी उल्लेखनीय कमी हुई है, जिसका सीधा लाभ व्यापारियों और किसानों को मिला है,” उन्होंने कहा।
बी. सुमिदा देवी ने विशेष रूप से छोटे व्यापारियों पर जीएसटी के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कम कर दरों से उन्हें अधिक पूंजी बचत का अवसर मिला, जिसे उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार में लगाया। उन्होंने कहा, “जीएसटी से छोटे व्यापारियों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिला है, जिससे आर्थिक विकास को आधार स्तर पर मजबूती मिली है।”
सत्र में यह भी बताया गया कि कुशल लॉजिस्टिक्स प्रणाली के कारण कृषि उत्पादों के परिवहन की लागत घटी है। इससे किसानों, थोक विक्रेताओं और उपभोक्ताओं सभी को लाभ हुआ है। विशेषज्ञों ने कहा कि समय और लागत की बचत ने कृषि आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।
इस अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक रिलेशन के संस्थापक मेजर अतुल देव ने पारंपरिक और आधुनिक पब्लिक रिलेशन टूल्स पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में जनसंचार की भूमिका कई गुना बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, “आज पीआर केवल सूचना प्रसार का माध्यम नहीं है, बल्कि नीति, अर्थव्यवस्था और समाज के बीच सेतु का कार्य करता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी के विकास से पब्लिक रिलेशन का वैश्वीकरण हुआ है, लेकिन इसके साथ फेक न्यूज, डेटा प्राइवेसी और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। “इन चुनौतियों से निपटने के लिए पीआर पेशेवरों को विश्वसनीयता और नैतिकता को सर्वोपरि रखना होगा,” उन्होंने कहा।
अधिवेशन के दूसरे दिन के चौथे सत्र में भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करने में जनसंचार की भूमिका पर चर्चा हुई। मॉस्लोव एजेंसी के डायरेक्टर जनरल मिशेल मास्लोव ने कहा कि भारत और रूस पारंपरिक मित्र हैं और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, “यदि भारत और रूस के बीच पब्लिक रिलेशन और संचार बेहतर हो जाए, तो भाषाई बाधाएं और सूचना का अभाव दूर किया जा सकता है।”
उन्होंने भारत के आर्थिक सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि भारत तेजी से एक मजबूत और समृद्ध अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। फार्मा, कृषि, पर्यटन और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
अधिवेशन के दौरान पांच पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, जिसमें जनसंचार, कानून, मीडिया प्रबंधन और विकसित भारत से जुड़े विषय शामिल थे। इससे अधिवेशन का बौद्धिक और अकादमिक पक्ष भी मजबूत हुआ।
देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत की गई, जिसने देशभर से आए प्रतिनिधियों को स्थानीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया।
अधिवेशन में विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि जीएसटी और वन नेशन, वन टैक्स जैसी नीतियां केवल कर सुधार नहीं हैं, बल्कि ये भारत की आर्थिक संरचना को आधुनिक, समावेशी और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।






